South Korea: दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री को 23 साल की सजा, जाने क्या है मामला

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

South Korea: पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की ओर से देश में मार्शल लॉ लगाने को संविधान के खिलाफ दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने विद्रोह करार दिया. इसी के साथ अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति के करीबी सहयोगी और पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल की सजा सुनाई. यह फैसला यून प्रशासन से जुड़े विद्रोह के मामलों में पहला बड़ा दोषसिद्धि फैसला माना जा रहा है.

बुधवार को दिए गए फैसले में सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि यून सुक-योल का मार्शल लॉ आदेश एक तरह का ‘खुद का तख्तापलट’ था, जिसका मकसद संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करना था. अदालत ने संसद और चुनाव कार्यालयों में सेना व पुलिस की तैनाती को गंभीर अस्थिरता फैलाने वाला कदम बताया.

हान डक-सू को क्यों मिली सजा?

अदालत के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री हान डक-सू ने मंत्री परिषद की बैठक के जरिए मार्शल लॉ आदेश को प्रक्रियात्मक वैधता देने की कोशिश की और इस तरह विद्रोह में अहम भूमिका निभाई. उन्हें मार्शल लॉ घोषणा में हेर-फेर, दस्तावेज नष्ट करने और शपथ के तहत झूठ बोलने का भी दोषी ठहराया गया. अदालत के फैसले में कहा गया कि हान ने संविधान की रक्षा करने के अपने कर्तव्य की अनदेखी की और यह मानते हुए विद्रोह का हिस्सा बने कि यह सफल हो सकता है. अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसे कृत्यों से देश एक बार फिर उस दौर में लौट सकता था, जहां नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचला जाता है.

सजा सुनाए जाने के बाद हान डक-सू को तत्काल जेल भेज दिया गया. इससे पहले वे हिरासत में नहीं थे. मालूम हो कि स्वतंत्र अभियोजक ने उनके लिए 15 साल की सजा मांगी थी, ऐसे में 23 साल की सजा को अप्रत्याशित माना जा रहा है. हान इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

यह फैसला राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ चल रहे मामलों के लिए भी अहम माना जा रहा है. यून पर विद्रोह का मास्टरमाइंड होने का आरोप है और उनके खिलाफ स्वतंत्र अभियोजक मृत्युदंड तक की मांग कर चुके हैं. उनके विद्रोह मामले पर 19 फरवरी को फैसला आने की संभावना है. यून पहले से ही कई मामलों में जेल में हैं और उन्होंने सभी आरोपों से इनकार करते हुए जांच को राजनीति से प्रेरित बताया है.

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