Supreme Court: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी स्कूल छात्राओं को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड दें. साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट सुनिश्चित करें. कोर्ट ने सभी स्कूलों में दिव्यांगों के लिए अनुकूल टॉयलेट उपलब्ध कराने को कहा है.
‘ऐसा नहीं हुआ तो रद्द कर दी जाएगी मान्यता‘
कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्राइवेट स्कूल लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग टॉयलेट और सैनिटरी पैड देने में फेल होते हैं तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी.
और क्या कहा कोर्ट ने?
जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे सभी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग टॉयलेट पक्का करें. सभी स्कूलों को, चाहे वे सरकार द्वारा चलाए जा रहे हों या उनके कंट्रोल में हों, दिव्यांगों के लिए सही टॉयलेट देने होंगे. बेंच ने यह भी कहा कि अगर सरकारें भी लड़कियों को टॉयलेट और फ्री सैनिटरी पैड देने में फेल होती हैं, तो वह उन्हें जिम्मेदार ठहराएगी.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2024 को जया ठाकुर की ओर से फाइल की गई एक जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक की टीएनएज लड़कियों के लिए सरकारी और सरकारी मदद वाले स्कूलों में केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे भारत में लागू करने की मांग की गई थी.

