UP Madrasas News: राज्य के मदरसों में पढ़ने वाले विदेशी नागरिकों के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार और इमिग्रेशन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. इमिग्रेशन और विदेशी अधिनियमों के उल्लंघन के आरोपों के बीच राज्य के सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है. सरकार का कहना है कि विदेशी नागरिकों की शिक्षा और रहने से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है.
सरकार की तरफ से जारी निर्देशों के अनुसार
सरकार की तरफ से जारी निर्देशों के अनुसार, , सभी विदेशी नागरिकता वाले छात्रों को दो दिनों के भीतर भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. इसके लिए छात्रों को RISE फॉर्म पोर्टल पर निर्धारित फॉर्म भरना होगा. ऐसा न करने पर छात्रों और संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसमें नेपाली छात्र भी शामिल हैं.
इस मामले को लेकर आजमगढ़ की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने मंगलवार को एक स्पष्ट आदेश जारी किया. इस आदेश में कहा गया है कि जिन मदरसों में विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं, उन्हें फौरन अपने संस्थानों में पढ़ने वाले ऐसे सभी छात्रों की लिस्ट, उनकी नागरिकता का प्रमाण, एडमिशन की पूरी जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपने कार्यालय में जमा करने होंगे. इसका मकसद उच्च अधिकारियों को समय पर सही और पूरी जानकारी देना है.
क्या कहा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने?
जराए के अनुसार, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सभी जिलों के मदरसों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे बिना वैध अनुमति के किसी भी विदेशी नागरिक को मदरसों में एडमिशन या पढ़ाई करने की अनुमति न दें. यह कदम इमिग्रेशन नियमों के भविष्य में होने वाले किसी भी उल्लंघन को रोकने के लिए उठाया गया है.
SP और दूसरे अधिकारियों को दिया गया है ये निर्देश
एक उर्दू अखबार में यह दावा किया गया है कि राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश इमिग्रेशन विभाग इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के संदर्भ में देख रहे हैं. इसी वजह से सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और दूसरे संबंधित अधिकारियों से उनके संबंधित जिलों में मदरसों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या, उनकी नागरिकता, वीज़ा स्थिति और रजिस्ट्रेशन के विवरण के बारे में जानकारी मांगी गई है. सरकार का मानना है कि अगर समय पर सही डेटा एकत्र नहीं किया गया, तो भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को तालमेल बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया है.