‘अब पिछली लड़ाई से लंबा खिंच सकता है युद्ध…’, ट्रंप के बयान पर ईरान की खुली चेतावनी

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran US Conflict: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ कोई भी नया युद्ध पिछली लड़ाई से लंबा खिंच सकता है. यह चेतावनी तब आई है, जब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हे अभी भी कुछ और ठिकानों को संभालना बाकी है.

इस विवाद की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ईरान में बचे हुए सैन्य ठिकानों को तेजी से निशाना बनाने की बात कही.

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘हमें अभी भी एक या दो ठिकानों को संभालना बाकी है और हम इसे 10 मिनट के अंदर अंजाम दे सकते हैं.’ उन्होंने विशेष रूप से पिकएक्स माउंटेन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका इसे बहुत जल्द निशाना बना सकता है.

इस बयान के साथ ही एक्सिओस की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ट्रंप ने शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर लंबी चर्चा की.

सूत्रों की माने तो, नेतन्याहू चाहते थे कि अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए, जबकि ट्रंप कूटनीतिक बातचीत का थोड़ा और समय देने के पक्ष में दिखे.

ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार

ट्रंप के बयान का पलटवार करते हुए ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, ‘भविष्य में होने वाला कोई भी युद्ध पिछली लड़ाई से कहीं अधिक लंबा खिंचेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति इस स्थिति में बिल्कुल नहीं होंगे कि वे अपनी मर्जी से युद्ध की शर्ते या समय तय कर सकें.’

साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खमेनेई के संदेश का हवाला देते हुए कहा, ‘अमेरिका के साथ संघर्ष में कोई भौगोलिक सीमा नहीं है, दुश्मन को नुकसान पहुंचाने के लिए एक बहुत बड़ा दायरा तय किया गया है.’

विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बचाव और कूटनीति दोनों विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन समझदारी इसी में है कि दूसरा पक्ष कूटनीति का रास्ता चुने.

उपराष्ट्रपति वेंस की चिट्ठी और तेहरान की सख्त शर्तें

तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल भी जारी है. ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने खुलासा किया कि उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का एक पत्र मिला है, जिसमें औपचारिक बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है.

रेजाई ने इसे अमेरिका के रुख में बदलाव तो माना, लेकिन साथ ही दो टूक कहा कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं, तब तक कोई बात नहीं होगी.

ईरान ने रखी चार प्रमुख शर्तें

ईरान ने बातचीत और वैश्विक ऊर्जा मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं. पहली शर्त विदेशों में जब्त (फ्रीज) ईरानी संपत्तियों को तत्काल मुक्त किया जाए. दूसरी ईरानी बंदरगाहों पर महीनों से जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त किया जाए, तीसरी ईरान पर लगे सभी पुराने आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं और चौथी शर्त क्षेत्र के सभी मोर्चों पर जारी सैन्य हमलों को तुरंत बंद किया जाए.

तनाव के इस दौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि UAE को उम्मीद है कि इन बातचीत से कोई बड़ा समाधान निकल सकता है, लेकिन वे सबसे बुरे हालात के लिए भी तैयार हैं. मनामा में एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि कूटनीतिक स्तर पर कोई बड़ी सफलता मिलेगी’

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