US Ship Attack: कैरिबियाई सागर में ड्रग्स की तस्करी के लिए इस्तेमाल की जा रही एक संदिग्ध नाव पर अमेरिकी सेना ने मंगलवार को हमला किया. इस हमले में चार लोग मारे गए. यह घटना लैटिन अमेरिका में कथित तस्करों के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के महीनों से चल रहे अभियान के दौरान हुई है.
हमलों में अब तक कितने लोगों की हुई मौत?
इस ताजा हमले के साथ ही अमेरिकी सेना के नावों पर किए गए हमलों में मारे गए लोगों की संख्या कम से कम 227 हो गई है. 68 बार ये हमले किए गए हैं और इनकी शुरुआत तब हुई थी, जब ट्रंप प्रशासन ने लगभग एक वर्ष पहले उन लोगों को निशाना बनाना शुरू किया, जिन्हें वे ‘नार्को-टेररिस्ट’ (नशीले पदार्थों के तस्कर और आतंकवादी) कहते हैं।
क्या कहा सेना ने?
पूर्वी प्रशांत महासागर और कैरिबियाई सागर में हमलों के बारे में सेना के ज्यादातर बयानों की तरह ही अमेरिकी सदर्न कमांड ने कहा कि उसने तस्करी के जाने-पहचाने रास्तों पर कथित ड्रग तस्करों को निशाना बनाया.
इस बात का कोई सबूत सेना ने नहीं दिया कि नाव से ड्रग्स की तस्करी हो रही थी. एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में एक चलती हुई नाव जैसी चीज की तस्वीर दिखी, जिसके बाद एक चमक (फ्लैश) दिखाई दी.
मंगलवार को हुआ यह हमला, पूर्वी प्रशांत महासागर में अमेरिकी सेना की ओर से एक नाव पर किए गए हमले के ठीक दो दिन बाद हुआ, जिसमें ड्रग्स की तस्करी के आरोपी दो लोग मारे गए थे. यह कार्रवाई कथित तस्करों के खिलाफ अमेरिकी अभियान में दो महीने से के ज्यादा अंतराल के बाद की गई थी.
कौन-सी समझौता करने की कोशिश कर रहा ट्रंप प्रशासन?
ट्रंप प्रशासन कई लैटिन अमेरिकी देशों में जमीन पर भी अपना हमलावर अभियान चलाने के लिए सहयोगी देशों के साथ समझौते करने की कोशिश कर रहा है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस महीने पनामा की यात्रा की.
इस दौरान कहा कि कोलंबिया, ग्वाटेमाला और होंडुरास इस बात पर सहमत हो गए हैं कि अमेरिका उनकी जमीन पर आपराधिक समूहों के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान चला सके. ग्वाटेमाला ने ऐसे किसी समझौते पर पहुंचने से इनकार किया. इक्वाडोर ने मार्च में अमेरिका के साथ इसी तरह के मिशन शुरू किए थे.
हमले को लेकर क्या सवाल उठे?
आलोचकों ने नावों पर किए गए हमलों की कानूनी वैधता और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं. आंशिक रूप से इसलिए, क्योंकि कई जानलेवा ओवरडोज के लिए जिम्मेदार फेंटानिल की तस्करी आमतौर पर मेक्सिको से जमीन के रास्ते अमेरिका में की जाती है, जहां इसे चीन और भारत से आयातित रसायनों से बनाया जाता है. इन हमलों की कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों और सैन्य कानून के जानकारों ने कड़ी आलोचना की है.

