Yoga Mudras for Mental Peace: योग को अक्सर शरीर को लचीला और सक्रिय बनाए रखने वाले अभ्यास के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसका संबंध सिर्फ शारीरिक फिटनेस से नहीं है. योग में ऐसी कई मुद्राएं और बंध भी बताए गए हैं, जिन्हें शरीर, सांस और मन के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ मानसिक स्थिरता और एकाग्रता के लिए उपयोगी माना जाता है. इनका अभ्यास ध्यान और प्राणायाम के दौरान भी किया जाता है.
ज्ञान मुद्रा
ज्ञान मुद्रा योग की सबसे सरल और प्रचलित हस्त मुद्राओं में शामिल है. इसे करने के लिए सुखासन, पद्मासन या अपनी सुविधानुसार किसी आरामदायक स्थिति में बैठें. इस दौरान रीढ़ सीधी रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखें. अब तर्जनी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से हल्के से स्पर्श कराएं. बाकी उंगलियों को सीधा और बिना तनाव के रखें. इस मुद्रा का अभ्यास खासतौर पर ध्यान के दौरान किया जाता है. इसे मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है.
चिन मुद्रा
चिन मुद्रा में भी अंगूठे और तर्जनी उंगली के सिरों को आपस में हल्के से मिलाया जाता है. इसमें हथेलियां ऊपर की ओर रहती हैं. आंखें बंद करके अपना ध्यान सांसों पर केंद्रित किया जा सकता है. इस मुद्रा को प्राणायाम और ध्यान के दौरान किया जाता है. नियमित अभ्यास को मानसिक स्थिरता और ध्यान केंद्रित करने में मददगार माना जाता है.
महाबंध
महाबंध को योग की तीन प्रमुख बंध तकनीकों के संयुक्त अभ्यास के रूप में बताया जाता है. इसमें मूलबंध, उड्डियान बंध और जालंधर बंध शामिल होते हैं. इस अभ्यास में सांस छोड़ने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार श्वास रोककर क्रम से इन बंधों का अभ्यास किया जाता है. महाबंध अपेक्षाकृत उन्नत योग अभ्यास है. इसलिए इसे सीखने के लिए प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख लेना बेहतर माना जाता है.
उड्डियान बंध
उड्डियान बंध में सांस को पूरी तरह बाहर निकालने के बाद पेट को अंदर और ऊपर की दिशा में खींचने का अभ्यास किया जाता है. हठ योग में इसे एक महत्वपूर्ण आंतरिक अभ्यास माना गया है. इसका अभ्यास खाली पेट और सही तकनीक के साथ करना चाहिए. शुरुआत में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और अपनी क्षमता से अधिक समय तक सांस रोकने से बचना जरूरी है.
जालंधर बंध
जालंधर बंध में सांस रोकते हुए ठोड़ी को छाती की ओर लाने का अभ्यास किया जाता है. इसे भी योग की उन्नत तकनीकों में शामिल किया जाता है. इस अभ्यास को गलत तरीके से करने या लंबे समय तक सांस रोकने के बजाय किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक से इसकी सही तकनीक सीखना बेहतर है.
अगोचरी मुद्रा या नासाग्र दृष्टि
अगोचरी मुद्रा, जिसे नासाग्र दृष्टि भी कहा जाता है, में आंखों की दृष्टि को नाक की नोक पर टिकाने का अभ्यास किया जाता है. शुरुआत में इसे कुछ सेकंड के लिए ही करना चाहिए और आंखों पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहिए. अभ्यास के बाद आंखों को बंद करके उन्हें आराम देना चाहिए. इस मुद्रा को मन को एक बिंदु पर केंद्रित करने में सहायक माना जाता है.
षण्मुखी मुद्रा
षण्मुखी मुद्रा में हाथों की उंगलियों की मदद से आंख, कान, नाक और मुंह के आसपास के इंद्रिय-द्वारों को हल्के रूप से बंद किया जाता है. इसका उद्देश्य बाहरी उत्तेजनाओं से ध्यान हटाकर मन को भीतर की ओर ले जाना है. इस दौरान भीतर की ध्वनियों और सांस पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया जाता है. इसे ध्यान को अंदर की ओर केंद्रित करने वाले अभ्यास के रूप में बताया जाता है.
आकाशी मुद्रा
आकाशी मुद्रा में मध्यमा उंगली और अंगूठे के सिरों को हल्के से स्पर्श कराया जाता है. इसे ध्यान के साथ किया जा सकता है. योग परंपरा में इस मुद्रा को मानसिक शांति और एकाग्रता से जोड़ा जाता है. इसका अभ्यास ध्यान के दौरान किया जा सकता है.
शाम्भवी मुद्रा
शाम्भवी मुद्रा में ध्यान को दोनों भौंहों के बीच मौजूद क्षेत्र पर सहज रूप से केंद्रित किया जाता है. इसे करते समय आंखों को जबरदस्ती ऊपर की ओर उठाने के बजाय सहज रखना चाहिए. ध्यान और मानसिक स्थिरता से जुड़े अभ्यासों में शाम्भवी मुद्रा का इस्तेमाल किया जाता है. अभ्यास के दौरान किसी तरह का तनाव या जोर डालने से बचना चाहिए.
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