Tulsi Plant Benefits: घर के आंगन के बीच तुलसी चौरा होने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. सुबह सुबह कोई पौधे को पानी देता, कोई दीपक जलाता और घर के बच्चे उसके आसपास खेलते रहते. देखने में यह परंपरा धार्मिक लगती है, लेकिन इसके पीछे घर की बनावट, साफ-सफाई और प्राकृतिक माहौल से जुड़े कई व्यावहारिक पहलू भी थे.
बता दें कि उस दौर में न एयर प्यूरिफायर थे, न मच्छर भगाने के आधुनिक साधन और न ही घर के हर कमरे में रोशनी पहुंचाने की सुविधा. ऐसे में आंगन में पौधे लगाना घर के वातावरण को बेहतर बनाए रखने का एक आसान तरीका था. तुलसी को खास जगह मिलने की एक वजह उसका धार्मिक महत्व जरूर था, लेकिन इसके औषधीय गुण और इसकी देखभाल से जुड़ी रोजाना की आदतें भी महत्वपूर्ण थीं. यही कारण है कि तुलसी चौरा सिर्फ पूजा की जगह नहीं, पुराने घरों की जीवनशैली का हिस्सा भी बन गया था.
आंगन के बीच तुलसी लगाने की परंपरा क्यों बनी?
दरअसल, पुराने जमाने के घरों के बीच खुला आंगन होता था, जहां धूप और हवा आसानी से पहुंचती थी, जिससे तुलसी के पौधे को भी पर्याप्त रोशनी मिलती थी और घर के लोग भी आसानी से उसकी देखभाल कर पाते थे. सुबह तुलसी को पानी देना और आसपास सफाई करना एक रोज की आदत थी. इस छोटी-सी दिनचर्या का फायदा यह भी था कि घर का आंगन साफ रहता था. यानी धार्मिक परंपरा के साथ स्वच्छता की आदत भी जुड़ गई थी.
तुलसी और घर के वातावरण का संबंध
तुलसी के पत्तों में पाए जाने वाले प्राकृतिक तेलों की अपनी खास गंध होती है. ऐसे में पौधे के आसपास रहने से एक अलग तरह की ताजगी महसूस होती है. वैज्ञानिक तौर पर तुलसी का पौधा हर तरह के प्रदूषण को खत्म कर देता है साथ ही बहुत बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन देती है, घर में इस पौधे होना वातावरण को हराभरा बनाने और प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाने में मदद करता है.
कीट-पतंगों से भी जुड़ी थी मान्यता
तुलसी की तेज सुगंध और उसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसे लंबे समय से कीटों को दूर रखने वाले पौधों में गिना जाता रहा है. पुराने दौर में मच्छर और दूसरे कीड़े भगाने के लिए आज जैसे कई आधुनिक विकल्प उपलब्ध नहीं थे. ऐसे में तुलसी समेत सुगंधित पौधों को घर के आसपास रखना आम बात थी.
‘जड़ी-बूटियों की रानी’ क्यों कही जाती है तुलसी?
दरअसल, तुलसी का इस्तेमाल भारतीय घरेलू परंपराओं में लंबे समय से होता आया है. चाय या काढ़े में तुलसी की पत्तियां डालना आज भी कई घरों में आम है. बदलते मौसम में लोग इसका इस्तेमाल गले की खराश और सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य परेशानियों के दौरान घरेलू उपाय के तौर पर करते हैं.
ऐसे में आज भले ही घर छोटे हो गए हैं और आंगन की जगह बालकनी या छत ने ले ली है. फिर भी तुलसी का पौधा कई घरों में दिखाई देता है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब उसके पीछे धार्मिक भावना के साथ पौधों को घर में शामिल करने की आधुनिक सोच भी जुड़ गई है.

