Ajit Doval: भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है. चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच मंगलवार को हुई अहम बैठक के बाद चीन की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. दरअसल, हान झेंग ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच कजान और तियानजिन में दो महत्वपूर्ण बैठकें हुई हैं. इन मुलाकातों में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच सीमा विवाद सुलझाने और रिश्तों को पटरी पर लाने को लेकर कई अहम सहमतियां बनी थीं.
चीनी उपराष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच बनी इन सहमतियों ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधार और स्थिरता की राह पर वापस लाने में बड़ी भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की जरूरत है. हान झेंग ने दोनों देशों से अपील की कि शीर्ष नेताओं के बीच हुए समझौतों को अब संयुक्त रूप से जमीन पर लागू किया जाना चाहिए, ताकि दोनों पड़ोसियों के बीच शांति और आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सके.
भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय बातचीत का सिलसिला जारी
चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने भारत के साथ संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक आपसी विश्वास बढ़ाने और द्विपक्षीय रिश्तों को लगातार व स्थिर तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय बातचीत का सिलसिला जारी है. डोभाल और हान की मुलाकात में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता मजबूत करने पर चर्चा हुई. हान झेंग ने कहा कि दोनों देशों को सहयोग की नई संभावनाओं का फायदा उठाना चाहिए और साझा हितों वाले क्षेत्रों में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए. साथ ही उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर भारत और चीन के बीच समन्वय मजबूत करने की जरूरत बताई.
दोनो देशो के बीच सीमा विवाद के कारण तनाव
चीन के उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को उचित तरीके से प्रबंधित किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, मतभेदों को रिश्तों की दिशा तय करने देने के बजाय संवाद और सहयोग के जरिए उन्हें नियंत्रित करना जरूरी है. भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनाव रहा है. हालांकि, हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच संपर्क और बातचीत बढ़ी है. सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

