Padmasana Benefits: योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन देन है और नियमित योगाभ्यास शरीर और मन को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है. योग के अलग-अलग आसनों में पद्मासन का विशेष महत्व माना जाता है. यह एक ध्यानात्मक मुद्रा है, जो शरीर को स्थिर रखने, मन को एकाग्र करने और मानसिक शांति पाने के लिए अभ्यास किया जाता है. पद्मासन संस्कृत के दो शब्दों ‘पद्म’ यानी कमल और ‘आसन’ यानी बैठने की मुद्रा से मिलकर बना है. अंग्रेजी में इसे लोटस पोज कहा जाता है. इस आसन का इस्तेमाल मुख्य रूप से ध्यान और प्राणायाम के लिए स्थिर आधार बनाने के लिए किया जाता है.
पद्मासन करने की सही विधि
पद्मासन करने के लिए सबसे पहले किसी समतल और आरामदायक जगह पर बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा रखें. अब दाएं पैर को मोड़कर उसके पंजे को बाईं जांघ के ऊपर रखें. इसके बाद बाएं पैर को मोड़कर उसका पंजा दाईं जांघ के ऊपर रखें. दोनों पैरों को इस तरह रखें कि तलवे ऊपर की ओर रहें. अब रीढ़, गर्दन और सिर को सीधा रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या ध्यान मुद्रा में रखें. आंखें बंद करके सामान्य रूप से सांस लेते रहें और अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय तक इसी स्थिति में स्थिर बैठें. अगर शुरुआत में दोनों पैरों को इस स्थिति में रखना मुश्किल हो, तो जबरदस्ती न करें और अर्ध-पद्मासन से शुरुआत कर सकते हैं.
पद्मासन करने से क्या फायदे मिल सकते हैं?
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, पद्मासन एक स्थिर और आरामदायक ध्यानात्मक मुद्रा है. इसका अभ्यास मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है. योगाभ्यास के दौरान शरीर को स्थिर रखने के कारण यह ध्यान और प्राणायाम के लिए भी उपयोगी माना जाता है.
पाचन तंत्र के लिए हो सकता है फायदेमंद
पद्मासन में बैठने से पेट के आसपास हल्का दबाव पड़ता है. इससे पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. नियमित अभ्यास गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकता है.
पैरों और जोड़ों के लिए उपयोगी
पद्मासन में दोनों पैरों को मोड़कर रखा जाता है. नियमित अभ्यास से पैरों और जोड़ों के लचीलेपन में सुधार हो सकता है. लंबे समय तक खड़े रहने या चलने वाले लोगों को पैरों की थकान और दर्द में भी इससे राहत मिल सकती है.
रीढ़ को सीधा रखने में मदद
पद्मासन में बैठते समय पीठ को सीधा रखने पर जोर दिया जाता है. इससे सही बैठने की मुद्रा बनाए रखने में मदद मिल सकती है. नियमित अभ्यास झुककर बैठने की आदत को सुधारने और रीढ़ को सीधा रखने में सहायक हो सकता है.
महिलाओं के लिए भी उपयोगी
इस आसन के दौरान श्रोणि क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिल सकती है. नियमित अभ्यास महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी कुछ परेशानियों में आराम देने में सहायक हो सकता है.
पद्मासन न हो तो करें अर्ध-पद्मासन
पद्मासन में दोनों पैरों को मोड़कर विपरीत जांघों पर रखना होता है. शुरुआत में कई लोगों को ऐसा करने में परेशानी हो सकती है. अगर दोनों पैरों को एक साथ रखकर पद्मासन में बैठना मुश्किल हो, तो अर्ध-पद्मासन का अभ्यास किया जा सकता है, जिसमें एक पैर को विपरीत जांघ पर रखा जाता है. धीरे-धीरे अभ्यास और लचीलापन बढ़ने के बाद पद्मासन करने की क्षमता विकसित की जा सकती है.
इन लोगों को पद्मासन करने से बचना चाहिए
पद्मासन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है. जिन लोगों को घुटनों या टखनों में गंभीर दर्द या चोट है, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए. वहीं, अगर कमर दर्द की समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह के बिना पद्मासन का अभ्यास करने से बचना बेहतर है.

