रोने को कमजोरी न समझें! आंसू बहाने से शरीर और दिमाग पर पड़ता है ये असर

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Crying Benefits: रोते हुए किसी व्यक्ति को देखकर अक्सर यह मान लिया जाता है कि वह कमजोर है या अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रहा. बचपन से भी कई लोगों को “रोओ मत, मजबूत बनो” जैसी बातें सुनने को मिलती हैं. लेकिन रोना इंसानी भावनाओं को व्यक्त करने का एक स्वाभाविक तरीका है और कुछ परिस्थितियों में इसके बाद लोगों को भावनात्मक राहत महसूस हो सकती है. शोध में भी रोने और तनाव के बाद शरीर के शांत होने की प्रक्रिया के बीच संबंध के संकेत मिले हैं, हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है.

तनाव के बाद शरीर को शांत करने में मदद कर सकता है रोना

जब इंसान तनाव या भावनात्मक परेशानी से गुजरता है, तो शरीर में कई तरह की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं. दिल की धड़कन बढ़ सकती है, बेचैनी महसूस हो सकती है और दिमाग लगातार परेशान करने वाली बातों पर केंद्रित रह सकता है. कुछ शोधों के मुताबिक, रोने के बाद शरीर की शारीरिक सक्रियता सामान्य स्थिति की ओर लौट सकती है. एक अध्ययन में रोने के दौरान और उसके बाद हृदय गति में बदलाव देखे गए, जिससे शोधकर्ताओं ने माना कि रोना शरीर के संतुलन को बनाए रखने की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है.

आंसू भावनाओं को व्यक्त करने का स्वाभाविक तरीका

कई बार व्यक्ति किसी परेशानी या दुख को शब्दों में ठीक से व्यक्त नहीं कर पाता. ऐसे में रोना भावनाओं को बाहर जाहिर करने का एक स्वाभाविक माध्यम बन सकता है. किसी भरोसेमंद व्यक्ति के सामने रोने से बातचीत की शुरुआत हो सकती है और सामने वाला यह समझ सकता है कि व्यक्ति अंदर से परेशान है. शोध में भावनात्मक रोने को सामाजिक जुड़ाव और दूसरों से मदद या सहारा पाने के संकेत से भी जोड़ा गया है.

रोने के बाद मन हल्का क्यों महसूस होता है?

कई लोगों को रोने के बाद कुछ समय के लिए मन शांत या हल्का महसूस होता है. इसका संबंध भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें व्यक्त करने और स्वीकार करने से हो सकता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हर बार रोने से तनाव निश्चित रूप से खत्म हो जाता है. वैज्ञानिक शोध में रोने के बाद राहत से जुड़े परिणाम अलग-अलग पाए गए हैं और इसके प्रभाव व्यक्ति तथा परिस्थिति के अनुसार बदल सकते हैं.

आंखों के लिए भी जरूरी हैं आंसू

आंसू सिर्फ भावनाओं से जुड़े नहीं होते, बल्कि आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी हैं. आंसू आंखों की सतह को नम रखने में मदद करते हैं और आंखों पर एक पतली परत बनाए रखते हैं. धूल या किसी जलन पैदा करने वाली चीज के आंख में जाने पर अचानक पानी आना भी आंखों की सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है. लगातार या असामान्य रूप से आंखों से पानी आना हालांकि किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकता है.

कब बार-बार रोने को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

कभी-कभार रोना सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया हो सकता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को रोज या बहुत बार रोने का मन करता है, वह खुद को रोक नहीं पाता और इसका असर उसके काम, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है.

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