Middle East Conflict: इंग्लैंड में मौजूद अपने उस मिलिट्री एयर बेस से अमेरिकी एयर फोर्स ने बॉम्बर वापस बुला लिए हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जाता था. यह कदम RAF फेयरफोर्ड बेस पर एक संभावित आतंकी हमले की जांच के बाद उठाया गया है. पेंटागन के एक अधिकारी के मुताबिक, इन बॉम्बर को अमेरिका में उनके बेस पर वापस भेज दिया गया है. संवेदनशील मिलिट्री गतिविधियों पर बात करने के लिए अधिकृत न होने के कारण इस अधिकारी ने रविवार को नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी.
कई B-1 बॉम्बरों ने भरी उड़ान
मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस जैसे एविएशन पर नजर रखने वाले समूहों ने ईरान युद्ध की शुरुआत से ही RAF फेयरफोर्ड से दर्जनों B-52 और B-1 बॉम्बर को ऑपरेट होते देखा है. जानकारों ने रविवार को बेस से कई B-1 बॉम्बर को उड़ान भरते देखा. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इनमें नए हमले भी शामिल हैं. हालांकि, उन्होंने अमेरिकियों से शुरू में वादा किया था कि यह अभियान कुछ हफ्तों तक ही चलेगा. दरअसल, शनिवार को ट्रंप ने कहा, “ईरान को लेकर मुझे कुछ फैसले लेने हैं. ईरान को बुरी तरह तबाह कर दिया गया है. इसलिए अब सवाल बस यह है कि या तो यह आसान तरीका होगा, या फिर मुश्किल तरीका.”
सितंबर के आखिर में RAF फेयरफोर्ड में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद पिछले हफ्ते सेंट्रल लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को आतंकी हमले की साजिश रचने के शक में अरेस्ट किया गया था. कुल मिलाकर, जांच के दौरान 6 लोगों को हिरासत में लिया गया और फिर जमानत पर रिहा कर दिया गया. ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना का संबंध तेहरान से जोड़ा. हालांकि, ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है, लेकिन उसने पहले कहा है कि वह अपने इलाके पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी बेस को सही निशाना मानता है.
यू.के. के अधिकारियों का कहना है कि ईरान से जुड़े प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) ब्रिटेन और दूसरे देशों में आगजनी और अन्य हमलों के पीछे रहे हैं. इनमें से कई हमले यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर और डर फैलाने के मकसद से किए गए. उन्होंने पहले चेतावनी दी थी कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहता है, तो तेहरान यू.के. में अपने निशाने बढ़ा सकता है.

