West Asia War: गुरुवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नाकाबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटने या बंदरगाह पर जाने का निर्देश दिया है. सैन्य अधिकारियों के माताबिक, इनमें से ज्यादातर जहाज तेल टैंकर थे.
क्या कहा सेंट्रल कमांड ने?
सोशल मीडिया पर सेना ने जानकारी दी कि इस कार्रवाई में उन्हें काफी सहयोग मिला है. पकड़े जाने के बाद ज्यादातर जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया. इस मिशन का पैमाना बहुत बड़ा है. ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी करने के लिए 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 17 युद्धपोत और 100 से ज्यादा विमान तैनात किए गए हैं.
सैन्य कार्रवाई के कारण तनाव चरम पर
इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है. बुधवार तनाव तब और बढ़ गया, जब ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक जहाजों पर गोलियां चलाईं और उनमें से दो पर कब्जा कर लिया. यह घटना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले के ठीक 24 घंटे बाद हुई, जिसमें उन्होंने युद्धविराम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नाकाबंदी जारी रखने की बात कही थी.
ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान संकट को कम करने के लिए बातचीत की मेज पर आए. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि अमेरिका ने युद्धविराम के लिए कोई औपचारिक समय सीमा तय नहीं की है. हालांकि, उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी है. किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम का पूरा भंडार सौंपना होगा. यह शर्त गैर-परक्राम्य है, यानी इस पर कोई समझौता नहीं होगा.
क्या बोले ट्रंप?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक तेहरान कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं देता और बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक यह समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी. दूसरी तरफ ईरान ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस नाकाबंदी को युद्ध की कार्रवाई बताया है. उन्होंने कहा कि यह मौजूदा युद्धविराम का सीधा उल्लंघन है. ईरान ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी दबाव वाली रणनीति का डटकर विरोध करने के लिए तैयार है.