US Iran Conflict: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा किया गया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के लिए भारत की जमीन इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी है. विदेश मंत्रालय ने अलर्ट जारी करते हुए इस वायरल पोस्ट को फेक बताया है. यह स्पष्टीकरण विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट-चेक अकाउंट के जरिए सोशल मीडिया साइट एक्स पर दिया गया.
यह वायरल दावा एक पत्रकार से शुरू हुआ, जिसने आरोप लगाया कि अमेरिका ‘लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (LEMOA) के तहत किसी सैन्य संपत्ति को सहायता देने के लिए पश्चिमी भारत के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है. इस पोस्ट में आगे कोंकण तट के पास समुद्र में किसी संभावित तैनाती के बारे में भी अटकलें लगाई गईं और इसे ईरान तथा अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष से जोड़ा गया.
क्या कहा विदेश मंत्रालय ने?
हालांकि, MEA ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. विदेश मंत्रालय ने कहा, “फेक न्यूज अलर्ट! कृपया सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और बेबुनियाद दावों और पोस्ट से सावधान रहें!”
क्या थी वह फेक न्यूज?
यह दत्ता की उस पोस्ट का जवाब था, जिसमें लिखा था, “ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका ने भारत से एक ऐसे सैन्य संसाधन को सहायता देने की अनुमति मांगी है, जिसका इस्तेमाल पश्चिमी भारत से ईरान पर बमबारी करने के लिए किया जाएगा. नौकरशाही की भाषा में, इसका मतलब LEMOA की एक व्याख्या है.”
उन्होंने आगे लिखा, “भारतीय नौसेना का कोई भी बर्थ इतना लंबा नहीं है कि वह एक ऐसे विमानवाहक पोत को जगह दे सके, जिसका आकार नौ फुटबॉल मैदानों जितना हो, यानी होम गोल से लेकर रोमारियो की किक तक की दूरी जितना. इसलिए, यह लंगर डालकर खड़ा रहेगा, जबकि इसके गैली (रसोईघर) को रसद से भर दिया जाएगा. अमेरिकी सेना का यह जहाज कोंकण तट से कुछ दूरी पर लंगर डालकर खड़ा रहेगा.”