Assam Elections 2026: असम की गोलाघाट विधानसभा सीट को कभी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहां की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. जहां पहले कांग्रेस का दबदबा दिखता था, वहीं अब भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है.
ताजा चुनाव नतीजों में भाजपा उम्मीदवार अजंता नियोग ने गोलाघाट सीट पर शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बिटुपन सैकिया को बड़े अंतर से हराया. अजंता नियोग को कुल 1,02,212 वोट मिले, जबकि बिटुपन सैकिया को 58,453 वोट ही प्राप्त हो सके. इस तरह जीत का अंतर 43 हजार से अधिक रहा, जो इस मुकाबले में भाजपा की मजबूत स्थिति को साफ तौर पर दर्शाता है.
इतिहास और राजनीतिक बदलाव
गोलाघाट सीट की कहानी सिर्फ एक चुनावी नतीजे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह असम की बदलती राजनीति का एक बड़ा उदाहरण भी है. 1951 में अस्तित्व में आई इस सीट ने अब तक 15 विधानसभा चुनाव देखे हैं. शुरुआत से लेकर अब तक कांग्रेस यहां सबसे सफल पार्टी रही है, जिसने नौ बार जीत दर्ज की है. वहीं असम गण परिषद और कुछ अन्य दलों को भी समय-समय पर सफलता मिली, लेकिन लगातार पकड़ बनाए रखना किसी के लिए आसान नहीं रहा.
इस सीट का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. 1952 में राजेंद्रनाथ बरुआ ने कांग्रेस के टिकट पर जीत की शुरुआत की थी. इसके बाद कई नेता आए और गए, लेकिन लंबे समय तक कांग्रेस का प्रभाव बना रहा. खासतौर पर 2001 से 2016 के बीच अजंता नियोग ने कांग्रेस के लिए लगातार चार बार जीत दर्ज कर इस क्षेत्र में मजबूत जनाधार खड़ा किया.
2021 बना टर्निंग पॉइंट
साल 2021 इस सीट की राजनीति के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. चुनाव से ठीक पहले अजंता नियोग ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली. उनका यह कदम गोलाघाट के सियासी समीकरण को पूरी तरह बदलने वाला साबित हुआ. जिस सीट पर भाजपा को पहले कमजोर माना जाता था, वहां पार्टी ने पहली बार जीत का स्वाद चखा. उस चुनाव में भी अजंता नियोग ने कांग्रेस उम्मीदवार को 9,325 वोटों से हराया था.
इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई और वे वित्त मंत्री बनीं. इस पद ने न सिर्फ उनकी राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया, बल्कि इलाके में भाजपा के संगठन को भी नई ताकत दी. अगर मतदाताओं की बात करें, तो 2026 के चुनाव के लिए गोलाघाट में करीब 2,01,387 वोटर रजिस्टर्ड हैं. यह आंकड़ा पिछले चुनाव की तुलना में थोड़ा बढ़ा है. इलाका पूरी तरह ग्रामीण नहीं है, लेकिन लगभग 84 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते हैं. यहां किसी एक वर्ग का वर्चस्व नहीं है, बल्कि एसटी, एससी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोट मिलकर चुनावी गणित तय करते हैं.

