बॉम्बे हाई कोर्ट से ‘भारत छोड़ो नोटिस’ पर एक्टर इमरान खान को बड़ी राहत, अब 2 नवंबर को होगी सुनवाई

Mumbai: बॉम्बे हाई कोर्ट से आमिर खान के भांजे और एक्टर इमरान खान को फिलहाल बड़ी राहत मिली है. भारत छोड़ने के लिए जारी नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई. हालांकि, अदालत ने मामले की सुनवाई 2 नवंबर तक के लिए टाल दी है. केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक इमरान के खिलाफ जारी भारत छोड़ने के नोटिस की समयसीमा बढ़ाई जाएगी.

नोटिस को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती

इमरान खान ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की तरफ से जारी नोटिस को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी. 14 अक्टूबर को जारी इस नोटिस में उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था. बाद में भारत छोड़ने की समयसीमा 14 नवंबर तक निर्धारित की गई. यह कार्रवाई 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए एक विरोध प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद की गई थी. यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था.

आपराधिक मामलों के तहत आता है यह नोटिस

जब यह मामला मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की अदालत में आया तो बीच में एक वकील (सुनील कुमार) ने आकर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) का यह नोटिस आपराधिक मामलों के तहत आता है, जबकि यह याचिका सिविल मामलों से जुड़ी है. इसलिए नियमों के मुताबिक यह बेंच इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. दूसरी तरफ, इमरान खान के वरिष्ठ वकील वी.आर. ढोंड ने मध्यस्थ के इस रुख पर सवाल उठाया. उन्होंने तर्क दिया कि मुख्य न्यायाधीश ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ होते हैं और उनके पास इस मामले की सुनवाई करने का पूरा अधिकार है.

28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश

पीठ ने कहा कि वह मध्यस्थ के इस तर्क पर केंद्र सरकार का जवाब सुनना चाहती है. 44 साल के एक्टर इमरान खान पाल ने अपने वकीलों ज़ुल्फिकार मेमन और परवेज मेमन के माध्यम से 14 अक्टूबर को जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था. यह कार्रवाई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन के समर्थन में 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए एक प्रदर्शन में उनकी कथित भागीदारी के बाद दर्ज FIR के आधार पर की गई थी.

ये अधिकार विदेशियों को भी प्राप्त

इमरान खान ने अपनी याचिका में केंद्र की इस कार्रवाई को ‘मनमाना’ और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा कि ये अधिकार विदेशियों को भी प्राप्त हैं. याचिका में तर्क दिया गया कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना यह नोटिस जारी किया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है. एक्टर ने याचिका में कहा कि वह दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं, उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. उनका विवाह भारत में हुआ है और उनका एक बच्चा भी है.

सुनवाई 2 नवंबर तक के लिए स्थगित 

वह पेशे से एक्टर हैं और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक हैं. OCI पंजीकरण जीवनभर का, मल्टीपल-एंट्री वीजा अधिकार प्रदान करता है. नागरिकता अधिनियम की धारा 7B(2) के तहत केवल संवैधानिक पदों, मतदान और सरकारी नौकरियों जैसे सीमित अधिकार ही वर्जित हैं और इनमें से कोई भी प्रतिबंध किसी सार्वजनिक स्थान पर उनकी मौजूदगी को नहीं रोकता. बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान की याचिका पर सुनवाई 2 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक भारत छोड़ने के नोटिस की समय सीमा बढ़ा दी गई है.

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