Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों से जुड़ी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. रविवार सुबह 8 बजे तक सात और बच्चों की मौत दर्ज की गई है. इसके साथ ही देश में 2026 के दौरान खसरे से जुड़ी कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर 738 हो गया है. इनमें लैब में पुष्टि किए गए और संदिग्ध, दोनों तरह के मामले शामिल हैं. चिंता की बात यह है कि संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है. देश में संदिग्ध खसरे के मामलों की संख्या 1 लाख के पार पहुंच चुकी है, जबकि हजारों मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है.
मई में 1.84 करोड़ बच्चों को टीका लगाने का अभियान चलाए जाने के बावजूद संक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके पीछे कुछ इलाकों में टीकाकरण का लक्ष्य पूरा न होने और संक्रमण रोकने के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू न किए जाने को अहम कारण बताया है. इसी बीच डेंगू का मौसम नजदीक आने से पहले से बीमार बच्चों के लिए खतरा और बढ़ने की आशंका जताई गई है.
सात और बच्चों की मौत, कुल आंकड़ा 738 पहुंचा
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज यानी DGHS के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक दर्ज सात नई मौतों को संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में दर्ज किया गया है. यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजा आंकड़ों के बाद देश में संदिग्ध खसरे से हुई मौतों की संख्या बढ़कर 645 हो गई है.
वहीं लैब में पुष्टि किए गए खसरे के मामलों में अब तक 93 मौतें दर्ज की गई हैं. इस तरह 2026 में पुष्टि किए गए और संदिग्ध खसरे के मामलों को मिलाकर कुल मौतों की संख्या 738 तक पहुंच गई है.
925 नए संदिग्ध मामले आए सामने
इसी अवधि के दौरान बांग्लादेश में 925 नए संदिग्ध खसरे के मामले दर्ज किए गए हैं. इसके बाद देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,05,618 हो गई है. इसके अलावा 106 नए लैब-पुष्टि वाले खसरे के मामले भी सामने आए हैं. इन नए मामलों के साथ अब तक लैब में पुष्टि किए गए खसरे के कुल मामलों की संख्या 12,632 हो गई है.
88 हजार से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती
DGHS के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च के बाद से अब तक 88,844 मरीजों को संदिग्ध खसरे के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है. इनमें से 85,122 मरीज ठीक होने के बाद घर लौट चुके हैं. इसके बावजूद संक्रमण के नए मामलों का सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है.
1.84 करोड़ बच्चों के टीकाकरण के बाद भी बढ़ते रहे मामले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संदिग्ध खसरे के मामलों की संख्या एक लाख से ज्यादा होने के बाद भी संक्रमण का प्रसार जारी रहा. यह स्थिति ऐसे समय सामने आई, जब मई में 1.84 करोड़ बच्चों को टीका लगाने के लिए अभियान चलाया गया था. इसके बावजूद मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आई.
जून में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा था कि कुछ इलाकों में टीकाकरण पूरी तरह नहीं हो पाया और संक्रमण रोकने के उपाय भी सही तरीके से लागू नहीं किए गए. इसी वजह से खसरे के मामले बढ़ते रहे. विशेषज्ञों ने यह चेतावनी भी दी कि डेंगू का मौसम आने से पहले से बीमार बच्चों के लिए खतरा और बढ़ सकता है.
मुश्ताक हुसैन ने बताए मामले कम न होने के दो मुख्य कारण
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने खसरे के मामलों में कमी न आने के पीछे दो मुख्य कारण बताए. उन्होंने कहा कि पहला कारण हर इलाके में 95 प्रतिशत तक टीकाकरण का लक्ष्य पूरा न होना है. दूसरा कारण अस्पतालों और समुदायों में संक्रमण रोकने के नियमों का सही तरीके से पालन न किया जाना है.
आइसोलेशन और क्वारंटीन जैसे कदमों को किया गया नजरअंदाज
रिपोर्ट के अनुसार, मुश्ताक हुसैन ने कहा कि आइसोलेशन और क्वारंटीन जैसे जरूरी कदमों को लगभग नजरअंदाज किया गया, जबकि बीमारी को नियंत्रित करने के लिए ये उपाय बेहद जरूरी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण अभियान का लक्ष्य समय की कमी के कारण दफ्तरों में बैठकर ऑनलाइन तरीके से तय किया गया. इससे योजना सही तरीके से नहीं बन पाई और संभव है कि कई बच्चे टीकाकरण से छूट गए हों.
पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नए अभियान का सुझाव
मुश्ताक हुसैन ने सुझाव दिया कि पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए नया टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए. उन्होंने घर-घर जाकर सही योजना तैयार करने की जरूरत बताई, ताकि खसरे के मामलों को कम किया जा सके और टीकाकरण से छूटे बच्चों तक पहुंच बनाई जा सके.
यह भी पढ़े: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंतीः CM योगी ने प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि, किया नमन

