Health Tips: राजस्थान में 15 दिनों तक चले अभियान के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच में फेल पाई गई सात दवाओं के वितरण और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दिया है. इसके साथ ही इन दवाओं की सूची भी जारी की गई है. वहीं, इन दवाओं का स्टॉक तत्काल बाजार से हटाने और नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए गए हैं.
1 से 15 अप्रैल 2026 के बीच अभियान
दरअसल, राजस्थान में अवमानक दवाओं के खिलाफ आयुक्तालय ने 1 से 15 अप्रैल 2026 के बीच अभियान चलाकर जांच की थी. इस कार्रवाई के दौरान जिन दवाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें सेफिक्साइम ओरल सस्पेंशन (लोराक्सिम ड्राई सिरप), एल्बेंडाजोल टैबलेट, इस्टोकफ-एलएस ड्रॉप्स, मिथाइलप्रेडनिसोलोन टैबलेट (मिथाइलोएक्टिव-4), ओकुफ-डीएक्स सिरप, सेफ्यूरोक्साइम एसिटिल टैबलेट (एक्सटेंसिव-500) और सिप्रोफ्लोक्सासिन टैबलेट शामिल हैं.
मात्रा के मानकों पर खरी नहीं उतरीं ये दवाएं
ये दवाएं अलग-अलग फार्मा कंपनियों द्वारा बनाई गई थीं और विभिन्न बैचों में गुणवत्ता में कमी पाई गई. जांच के दौरान कई दवाएं Assay यानी सक्रिय तत्व की मात्रा के मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि कुछ दवाएं Dissolution टेस्ट में फेल पाई गईं. टेस्ट में फेल होने का मतलब है कि अगर कोई मरीज ये दवा खा रहा है तो उसकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि ये दवा उसके शरीर में सही तरीके से घुलकर असर नहीं कर पाएगी.
फेल पाई गई दवाओं की बिक्री पर रोक
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तहत एक प्रमुख नियामक संस्था है. यह राज्य में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता (मिलावट की रोकथाम) और दवाओं/सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण व बिक्री (मानक गुणवत्ता) को नियंत्रित करता है. विभाग ने जांच में फेल पाई गई सात दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है और निर्देश दिए है कि इन दवाओं का स्टॉक तुरंत बाजार से हटाया जाए और नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए.
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