बालों का झड़ना रोकने से हड्डियों को मजबूती देने तक, बेहद खास है पृथ्वी मुद्रा; जानें रोज करने के फायदे

Divya Rai
Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Divya Rai
Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Prithvi Mudra: हमारा शरीर पांच मूल तत्वों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना माना जाता है. योग और आयुर्वेद की मान्यताओं के मुताबिक, इन तत्वों का संतुलन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. जब शरीर में इनका संतुलन बिगड़ता है, तो कई तरह की परेशानियां महसूस हो सकती हैं. योग में हाथों की विशेष मुद्राओं के जरिए इन तत्वों के संतुलन को बनाए रखने की परंपरा है. ऐसी ही एक मुद्रा है पृथ्वी मुद्रा, जिसे शरीर में स्थिरता और मन को शांति देने से जोड़कर देखा जाता है.

क्या है Prithvi Mudra और कैसे किया जाता है इसका अभ्यास?

पृथ्वी मुद्रा को योग की प्रमुख हस्त मुद्राओं में गिना जाता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, इसे शरीर में पृथ्वी तत्व के संतुलन और शारीरिक व आध्यात्मिक आरोग्य को बढ़ावा देने वाली मुद्रा माना गया है. आयुर्वेदिक मान्यताओं में हाथ की अनामिका उंगली को पृथ्वी तत्व और अंगूठे को अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है. इस मुद्रा को बनाने के लिए अनामिका उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से हल्के से मिलाया जाता है. बाकी तीनों उंगलियों को सीधा रखा जाता है. योग की पारंपरिक अवधारणा के अनुसार, इस तरह उंगलियों को मिलाने से शरीर में पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है. इसे मूलाधार चक्र से भी जोड़ा जाता है, जो रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में स्थित माना जाता है.

मन की बेचैनी और अस्थिरता कम करने में मानी जाती है सहायक

योगिक मान्यताओं के अनुसार, मूलाधार चक्र का संबंध सुरक्षा, आत्मविश्वास और स्थिरता की भावना से होता है. इसके असंतुलन को डर, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है. पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने वाली योग प्रक्रिया के रूप में किया जाता है. माना जाता है कि नियमित अभ्यास से व्यक्ति को मानसिक स्थिरता और धैर्य विकसित करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इन प्रभावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं.

त्वचा की सेहत से भी जोड़ी जाती है यह मुद्रा

योग और आयुर्वेद की पारंपरिक मान्यताओं में पृथ्वी तत्व को शरीर की संरचना और मजबूती से जोड़ा जाता है. इसी आधार पर पृथ्वी मुद्रा को त्वचा और शरीर के ऊतकों की सेहत के लिए लाभकारी बताया जाता है. कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह मुद्रा रक्त संचार को बेहतर बनाने और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है. इससे त्वचा का रूखापन कम होने और प्राकृतिक चमक बनाए रखने जैसे फायदे भी जोड़े जाते हैं. हालांकि, पृथ्वी मुद्रा से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने या त्वचा संबंधी समस्याएं ठीक होने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

दुबलेपन और कमजोर पाचन में भी बताई जाती है फायदेमंद

पृथ्वी मुद्रा को पारंपरिक रूप से शरीर की ऊर्जा और पोषण से जोड़कर देखा जाता है. आयुर्वेदिक मान्यताओं में इसे कमजोर पाचन और दुबलेपन से परेशान लोगों के लिए उपयोगी बताया जाता है. ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को पोषण देने और स्वस्थ वजन बनाए रखने में सहायक हो सकती है. हालांकि, वजन बढ़ाने या पाचन संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए केवल इस मुद्रा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

किन लोगों को पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास करते समय सावधानी रखनी चाहिए?

जिन लोगों के शरीर में (Prithvi Mudra) कफ दोष की अधिकता मानी जाती है या जो सर्दी-खांसी और अस्थमा जैसी समस्याओं से गंभीर रूप से परेशान हैं, उन्हें नियमित अभ्यास शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. इसके अलावा, अस्थमा, त्वचा रोग, पाचन संबंधी परेशानी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए पृथ्वी मुद्रा को दवाओं और चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए. इसे चाहें तो सामान्य योग अभ्यास के एक हिस्से के रूप में शामिल किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें- खाना खाते ही टॉयलेट भागने की होती है जरूरत? जानें इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण, कब हो सकता है गंभीर खतरा

Latest News

CM योगी बोलेः अयोध्या का दीपोत्सव आस्था के साथ आर्थिकी को भी दे रहा नई ऊर्जा

CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारियों के बीच इसके सामाजिक और आर्थिक...

More Articles Like This