Kidney Stone Emergency Symptoms : कभी-कभी किडनी में बनने वाली पथरी वहीं रह जाती है, जबकि कुछ पथरियां यूरिन के रास्ते नीचे की ओर बढ़ने लगती हैं. बहुत छोटी पथरी अक्सर बिना किसी परेशानी के निकल जाती है, लेकिन अगर पथरी काफी बड़ी होती है तो वह रास्ता रोक सकती है और तेज दर्द की वजह बनती है.
ऐसे में किडनी स्टोन का आकार रेत के दाने जितना छोटा भी हो सकता है और कभी-कभी गोल्फ बॉल जितना बड़ा भी. बता दें कि छोटी पथरी कई बार बिना लक्षण के निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी काफी तकलीफ देती है. जैसे-
कमर या पेट के निचले हिस्से में एक तरफ तेज, चुभने वाला दर्द
बुखार और ठंड लगना
पेशाब में खून आना
लगातार मतली या उल्टी
पेशाब का रंग मटमैला होना या बदबू आना
अक्सर दर्द तब शुरू होता है जब पथरी अपनी जगह से हिलती है या यूरेटर में फंस जाती है.
हर तरह की पथरी अपने आप नहीं निकलती
प्राप्त जानकारी के अनुसार कई मामलों में पथरी खुद-ब-खुद निकल जाती है, लेकिन वहीं कुछ के लिए दवा या सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है. इस दौरान पथरी का आकार इलाज तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है.
किडनी स्टोन का साइज और इलाज
जानकारी के मुताबिक, 1 से 4 मिमी (बहुत छोटी पथरी) अक्सर ज्यादा पानी पीने से अपने आप निकल जाती है और दर्द के लिए दवा काफी होती है.
इसके साथ ही 5 से 7 मिमी की पथरी दवा और तरल पदार्थ से निकल सकती है, लेकिन अगर निकलने में समस्या हो तो शॉक वेव लिथोट्रिप्सी जैसी प्रक्रिया करनी पड़ सकती है.
8 से 10 मिमी (बड़ी पथरी) अपने आप निकलने की संभावना कम होती है. इसके लिए दवा लेनी आवश्यक है.
विशेष रूप से 10 मिमी से ज्यादा (बहुत बड़ी पथरी) ऐसी पथरी खुद नहीं निकलती. इसके लिए सर्जरी, यूरेटरोस्कोपी या पीसीएनएल जैसी प्रक्रिया जरूरी हो जाती है.
साइज के अनुसार जरूरी होती है सर्जरी
आमतौर पर 10 मिमी से बड़ी पथरी अपने आप नहीं निकलती और सर्जरी की जरूरत पड़ती है. यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी और ब्रिटेन की एनआईसीई गाइडलाइंस के अनुसार-
5 से 7 मिमी की पथरी भी अगर दर्द, रुकावट या जटिलता पैदा करे, तो इलाज जरूरी हो जाता है.
10 मिमी से बड़ी पथरी में सर्जरी या मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट किया जाता है.
इन बातों पर सर्जरी का फैसला निर्भर
बता दें कि सिर्फ साइज ही नहीं, कुछ और बातें भी अहम होती हैं-
पथरी की जगह– ऊपर की नली में फंसी पथरी नीचे की तुलना में जल्दी निकल सकती है.
मरीज की स्थिति– उम्र, पुरानी बीमारियां और दर्द सहने की क्षमता भी मायने रखती है.
किडनी की बनावट– किडनी का आकार और यूरिन ड्रेनेज क्षमता इलाज तय करती है.
पथरी का प्रकार– कुछ पथरियां शॉक वेव थेरेपी से नहीं टूटतीं.
बार-बार पथरी होना– ऐसे मामलों में छोटी पथरी के लिए भी सर्जरी पर विचार किया जा सकता है.
डॉक्टर को दिखाएं?
अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरन्त डॉक्टर से सलाह लें.
बहुत तेज या लंबे समय तक रहने वाला दर्द
लगातार उल्टी
पेशाब रुक जाना
बुखार या इंफेक्शन के लक्षण
पेशाब में खून
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