‘धूम्रपान नहीं किया फिर भी हो गया फेफड़ों का कैंसर?’ किस वजह से हो गई यह गंभीर बीमारी!

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HealthTips: धूम्रपान न करने वालों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है. भले ही आपने कभी सिगरेट को हाथ न लगाया हो, फिर भी आपको फेफड़ों के कैंसर का खतरा हो सकता है. फेफड़ों का कैंसर किसी को भी हो सकता है. हालांकि धूम्रपान इस बीमारी का प्रमुख कारण है लेकिन फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लगभग 5 में से 1 व्यक्ति ने कभी धूम्रपान नहीं किया होता या अपने जीवनकाल में 100 से कम सिगरेट पी होती हैं.

असामान्य कोशिकाओं के पनपने की क्रिया 

फेफड़ों में असामान्य कोशिकाओं के पनपने की क्रिया को फेफड़ों का कैंसर कहा जाता है. यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या है. मेडिकल भाषा में इसे मेटास्टेसिस कहते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक इस रोग में फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे लंग फेलियर यानी फेफड़ों की विफलता का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.

सबसे पहले बदल जाता है खांसी का पैटर्न

फेफड़ों के कैंसर में सबसे पहले खांसी का पैटर्न बदल जाता है. रोगी को लगातार खांसी रहती है, जो सामान्य सर्दी-जुकाम से अलग होती है और 2-3 हफ्तों तक बनी रह सकती है. खांसते समय खून आना भी कैंसर का संकेत हो सकता है. इसके अलावा गहरी सांस लेने, हंसने या खांसने के दौरान सीने में तेज दर्द महसूस हो सकता है. बढ़ते कैंसर के कारण रोगियों को सांस लेने में कठिनाई होती है. धीरे-धीरे सांस फूलने लगती है.

बिना कारण घटने लगता है शरीर का वजन

इसके अलावा आवाज में बदलाव भी देखा जा सकता है. जैसे-बोलते समय सीटी जैसी आवाज या गले में खराश के बिना आवाज का बैठ जाना. फेफड़ों के कैंसर के कारण शरीर का वजन बिना कारण घटने लगता है. लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है और बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यह निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को भी जन्म दे सकता है.

फेफड़े तक फैलने की संभावना

फेफड़ों के कैंसर का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता. यह छाती के बीच कॉलरबोन के आस-पास की ग्रंथियों और लिम्फ नॉड्स तक फैल सकता है. एडवांस स्टेज में पसलियों, रीढ़ की हड्डी और कूल्ही की हड्डियों तक भी जा सकता है. साथ ही मस्तिष्क, लिवर, किडनी के ऊपर मौजूद एड्रिनल ग्रंथियों और दूसरे फेफड़े तक फैलने की संभावना रहती है.

डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान और प्रदूषण से बचना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. शुरुआती लक्षणों की पहचान कर समय पर इलाज शुरू करने से रोग की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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