क्या चुपचाप स्ट्रेस झेल रहा आपका बच्चा? इन लक्षणों से पहचानें परेशानी, करें आसान समाधान

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Stress In Children: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, पढ़ाई का दबाव, बढ़ता कॉम्पिटिशन परिवार में कलह या आसपास की बुरी घटनाएं बच्चों के मन पर गहरा असर डाल रही हैं. क्या आपका बच्चा भी चुपचाप स्ट्रेस झेल रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे तनाव को अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं. कुछ लक्षण आसानी से दिख जाते हैं, तो कुछ छिपे रह जाते हैं. समय पर इन्हें पहचानकर सही कदम उठाए जा सकते हैं.

तनाव के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग होते हैं

यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, बच्चों में तनाव के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग होते हैं. अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर या काउंसलर की मदद लेनी चाहिए.

  • 0-3 साल के बच्चों में लक्षण :

इस उम्र में बच्चे देखभाल करने वालों से ज्यादा चिपक जाते हैं. पुराने व्यवहार जैसे बिस्तर गीला करना या थंब चूसना वापस शुरू हो सकता है. सोने-खाने में बदलाव, ज्यादा चिड़चिड़ापन, रोना, चंचलता बढ़ना और छोटी-छोटी चीजों से डरना आम लक्षण हैं.

  • 4-6 साल के बच्चों में लक्षण :

बड़ों से चिपके रहना, पुराने व्यवहार पर लौटना, सोने-खाने में गड़बड़ी, ध्यान न लगना, खेलना बंद करना, बोलना कम करना या ज्यादा बेचैन रहना तनाव के संकेत हो सकते हैं.

  • 7-12 साल के बच्चों में लक्षण :

इस उम्र में बच्चे अकेले रहना पसंद करने लगते हैं. दूसरों पर पड़ने वाले असर को लेकर बार-बार चिंता करना, सोने-खाने में बदलाव, लगातार डरना, गुस्सा बढ़ना, याददाश्त कम होना और शारीरिक दर्द जैसे सिरदर्द या पेट दर्द होना आम है.

  • 13-17 साल के किशोरों में लक्षण :

गहरा दुख, अपराधबोध, शर्मिंदगी, माता-पिता की बात न मानना, जोखिम भरे काम करना, खुद को नुकसान पहुंचाना या निराशा जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

  • सभी उम्र के बच्चों में शारीरिक लक्षण :

थकान, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, मुंह सूखना, पेट दर्द, सिरदर्द, कांपना और शरीर में दर्द तनाव के कारण हो सकते हैं. ये लक्षण किसी बीमारी के भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जांच जरूर कराएं.

गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर की तुरंत मदद लें Stress In Children

विशेषज्ञ बताते हैं कि (Stress In Children) गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर की तुरंत मदद लें जैसे पूरी तरह अलग-थलग रहना, बोलना बंद करना, लगातार कांपना, आक्रामक व्यवहार, दूसरों को चोट पहुंचाने की कोशिश या उलझन में रहना बहुत गंभीर संकेत हैं. ऐसे समय में तनाव में घिरे बच्चों या शख्स की मदद के लिए सबसे पहले बच्चे से भावनात्मक चेक-इन करें. उनसे सीधे पूछें या चित्र बनाने को कहें. चित्र के बारे में बात करने से बच्चे अपनी भावनाएं आसानी से व्यक्त कर पाते हैं.

तनाव कम करने वाली आसान गतिविधियां करवाएं

  • पेट से सांस लेना : बच्चे के हाथ पेट पर रखें. 5 सेकंड में सांस अंदर लें (पेट गुब्बारे की तरह फूले) और 5 सेकंड में बाहर छोड़ें. रोज 5-10 बार करें.
  • बच्चे को आंखें बंद करके शांत जगह की कल्पना करने को कहें. जैसे सफेद समुद्र तट, जहां सूरज की रोशनी, नरम रेत और हल्की हवा हो. यह कल्पना बच्चे को शांत करती है.
  • बच्चों को तनाव से निपटना सिखाएंः उन्हें प्यार, समय और ध्यान दें. नियमित खेलकूद, अच्छी नींद और संतुलित भोजन भी बहुत मदद करता है. अगर लक्षण 2-3 हफ्ते से ज्यादा बने रहें तो मनोवैज्ञानिक या बाल विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. बच्चों पर किसी तरह का दबाव न डालें.

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