Washington: अमेरिका ने क्रोनिक हेपेटाइटिस B के लिए एक नए इलाज को मंजूरी दे दी है. इससे कुछ मरीज वायरस को नियंत्रित रखते हुए अपनी एंटीवायरल दवाएं लेना बंद कर सकेंगे. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने ‘हिबसागो’ (बेपिरोविरसेन) को मंजूरी दी है. यह जीएसके द्वारा विकसित एक इंजेक्शन वाली दवा है, जो क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित उन वयस्कों के लिए है जिन्हें सिरोसिस नहीं है.
FDA का स्वीकृत पहला एंटीसेंस ओलिगोन्यूक्लियोटाइड
यह इलाज हेपेटाइटिस B के लिए FDA द्वारा स्वीकृत पहला एंटीसेंस ओलिगोन्यूक्लियोटाइड है. इसमें एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो उन जेनेटिक निर्देशों में बाधा डालती है, जिनकी मदद से वायरस अपनी संख्या बढ़ाता है और वायरल प्रोटीन बनाता है. इस नए तरीके से कुछ मरीज हेपेटाइटिस B का पूरा इलाज बंद करने के बाद भी वायरस को नियंत्रित रख सकते हैं.
सालों तक लेनी पड़ती हैं एंटीवायरल दवाएं
FDA के ऑफिस ऑफ इंफेक्शियस डिसीज की कार्यवाहक निदेशक वेंडी कार्टर ने कहा कि क्रोनिक हेपेटाइटिस B से पीड़ित कई लोगों के लिए, वायरस को दबाए रखने के लिए सालों तक एंटीवायरल दवाएं लेनी पड़ती हैं. उन्होंने कहा कि हिबसागो इलाज का एक नया तरीका पेश करता है, जिससे कुछ मरीज क्रोनिक एचबीवी का पूरा इलाज खत्म होने के बाद भी वायरस को नियंत्रित रख सकते हैं. यह मंजूरी इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रगति है.
खून में हेपेटाइटिस B वायरस का स्तर कम
यह मंजूरी उन वयस्कों के लिए है जिन्हें सिरोसिस नहीं है, जिन्होंने कम से कम छह महीने तक एंटीवायरल थेरेपी ली है और जिनके खून में हेपेटाइटिस B वायरस का स्तर दबा हुआ (कम) है. FDA द्वारा अधिकृत डायग्नोस्टिक टेस्ट के जरिए यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि मरीज के शरीर में हेपेटाइटिस B सरफेस एंटीजन का स्तर 3,000 इंटरनेशनल यूनिट प्रति मिलीलीटर या उससे कम हो.
दो क्लिनिकल ट्रायल में इलाज का मूल्यांकन
FDA ने बताया कि इस इलाज का मूल्यांकन दो क्लिनिकल ट्रायल में किया गया, जिसमें हिबसागो की तुलना एक प्लेसबो से की गई. मरीजों को 24 सप्ताह तक इंजेक्शन दिए गए, जबकि वे अपनी पहले से चल रही एंटीवायरल दवाएं भी लेते रहे. उन्हें हिबसागो का आखिरी इंजेक्शन लगने के बाद भी 24 सप्ताह तक अपना नियमित एंटीवायरल इलाज जारी रखना था. कुछ प्रतिभागियों को बाद में एंटीवायरल दवाएं बंद करने की अनुमति दी गई, बशर्ते वे तय किए गए मेडिकल और लैबोरेटरी मानदंडों को पूरा करते हों.
दवाएं बंद करने की शर्तों को पूरा करने में सफल
दोनों ट्रायल में हिबसागो लेने वाले 24 प्रतिशत मरीज अपनी एंटीवायरल दवाएं बंद करने की शर्तों को पूरा करने में सफल रहे, जबकि प्लेसबो ग्रुप में ऐसा कोई भी मरीज नहीं था. हेपेटाइटिस B का सारा इलाज बंद करने के 24 हफ्तों बाद भी हिबसागो लेने वाले 19 प्रतिशत मरीजों में वायरस पर नियंत्रण बना रहा और उनके खून में हेपेटाइटिस B सरफेस एंटीजन का पता नहीं चला.
दवा के साथ सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम
इन नतीजों से पता चलता है कि कुछ मरीजों में बिना लगातार इलाज के भी वायरस पर लंबे समय तक नियंत्रण बना रह सकता है, हालांकि ज्यादातर मरीजों के साथ ऐसा नहीं हुआ. एफडीए ने इस बात पर जोर दिया है कि इस दवा के साथ सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम हो सकते हैं. यह मंजूरी जीएसके पीएलसी को दी गई है. एफडीए की घोषणा में यह नहीं बताया गया है कि यह इलाज अमेरिका के बाहर (भारत सहित) कब से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होगा.
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