‘भारत के लिए ईरान, तो अमेरिका के लिए पाकिस्तान जरूरी’, मार्को रुबियो के बयान से क्यों छिड़ी चर्चा?

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Pakistan Tie: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ वाशिंगटन के राजनयिक संबंधों को लेकर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवाद का विरोध करता है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रखना जरूरी है. इसकी प्रमुख वजह पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है.

रुबियो के मुताबिक, किसी देश के साथ मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि उसके साथ बातचीत के रास्ते बंद कर दिए जाएं. उन्होंने भारत और ईरान के संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर ईरान के साथ संपर्क बनाए रखता है, वैसे ही अमेरिका को भी पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की जरूरत है.

आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का रुख स्पष्ट

एक इंटरव्यू के दौरान रुबियो (US Pakistan Tie) ने कहा कि अमेरिका दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ है. हालांकि, उन्होंने यह भी समझाया कि आतंकवाद का विरोध करने के साथ-साथ उन देशों के साथ संवाद बनाए रखना भी जरूरी है, जिनका अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खास महत्व है. पाकिस्तान के मामले में उन्होंने उसकी परमाणु क्षमता और भौगोलिक स्थिति को अहम बताया. उनके अनुसार, इस्लामाबाद के साथ संपर्क बनाए रखने से वाशिंगटन को क्षेत्रीय घटनाक्रम पर प्रभाव डालने और भारत की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर बातचीत करने का अवसर मिल सकता है.

भारत और ईरान के रिश्तों से क्यों की तुलना? US Pakistan Tie

रुबियो ने अपनी बात समझाने के लिए भारत और ईरान के संबंधों का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ईरान के नेताओं के साथ बातचीत करती है और संबंध बनाए रखती है. इसी तरह अमेरिका के लिए भी पाकिस्तान के साथ संवाद जारी रखना जरूरी है. उन्होंने संकेत दिया कि राजनयिक संपर्क का एक फायदा यह है कि इसके जरिए उन गतिविधियों को रोकने या हतोत्साहित करने की कोशिश की जा सकती है, जिनसे भारत को सुरक्षा संबंधी चिंताएं होती हैं. रुबियो के मुताबिक, यदि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संवाद बना रहता है, तो वाशिंगटन को इस्लामाबाद के सामने ऐसे मुद्दे उठाने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर बातचीत करने का मौका मिलता है.

मतभेदों के बावजूद बातचीत जारी रखना क्यों जरूरी?

अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना कि जिन देशों के साथ नीतिगत मतभेद हों, उनके साथ संबंध बनाए रखना आसान नहीं होता. इसके बावजूद उन्होंने कहा कि कूटनीति में संतुलन बनाना जरूरी है. उनके अनुसार, अमेरिका की विदेश नीति का हिस्सा यह होना चाहिए कि वह अपने हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों के साथ संवाद बनाए रखे. ऐसा करना केवल मित्र देशों के साथ संबंध मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन देशों के साथ भी जरूरी हो सकता है जिनकी नीतियों से अमेरिका सहमत नहीं है. पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर रुबियो की दलील भी इसी रणनीति पर आधारित है. वाशिंगटन के लिए इस्लामाबाद से बातचीत जारी रखना क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने व्यापक अंतरराष्ट्रीय हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

विदेश मंत्री बनने के बाद बदलीं रुबियो की प्राथमिकताएं

रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी जिम्मेदारियां पहले की तुलना में व्यापक हो गई हैं. अब उन्हें केवल किसी एक क्षेत्र या मुद्दे पर नहीं, बल्कि अमेरिका की समग्र विदेश नीति पर ध्यान देना होता है. उन्होंने बताया कि पहले सीनेटर के रूप में उनकी भूमिका अलग थी, लेकिन अब विदेश मंत्री होने के नाते उन्हें विभिन्न देशों के साथ संबंधों को संभालना पड़ता है. इसमें ऐसे देश भी शामिल हैं जिनके साथ अमेरिका के कई मुद्दों पर मतभेद हैं.

भारत के खिलाफ आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की भूमिका और इस्लामाबाद को अमेरिकी वित्तीय सहायता दिए जाने जैसे सवालों के संदर्भ में रुबियो की यह टिप्पणी सामने आई. उन्होंने अपने जवाब में इस बात पर जोर दिया कि राजनयिक संपर्क बनाए रखना अमेरिका की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. कुल मिलाकर, रुबियो के बयान से स्पष्ट होता है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंधों को केवल द्विपक्षीय मतभेदों के आधार पर नहीं देखता. परमाणु सुरक्षा, भौगोलिक स्थिति और दक्षिण एशिया में स्थिरता जैसे मुद्दे भी उसकी रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने की अमेरिकी नीति से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान किस हद तक होता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इन बातचीतों का व्यवहार में क्या परिणाम निकलता है.

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