35 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियां हो जाती हैं खोखली! बिना दर्द होता है बदलाव, जानें इससे बचने के उपचार..!

Health Tips: 30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं. खासकर, 20 की उम्र के दौरान धीरे-धीरे मज़बूत हुआ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है. चिंता तो इस बात की है कि ये कई सालों तक किसी की नज़र में नहीं आता. डॉक्टर के अनुसार कई महिलाओं 30 की उम्र में हड्डियों के स्वास्थ्य के बारे में सोचती तक नहीं है, लेकिन इसे समय शरीर में बड़े बदलाव चुपचाप शुरू हो जाते हैं.

दिखाई नहीं देते कोई स्पष्ट लक्षण

हड्डियों के घनत्व में धीरे-धीरे कमी आने लगती है. यह प्रक्रिया धीमी होती है और अक्सर पूरी तरह से किसी का ध्यान नहीं जाता. शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. न कोई थकान, न कोई दिखाई देने वाली कमज़ोरी. हड्डियों का नुकसान चुपचाप होता रहता है, जब तक कि यह उस बिंदु तक नहीं पहुंच जाता, जहां नुकसान फ्रैक्चर या पुराने दर्द के रूप में सामने आता है.

बिल्कुल नहीं होता कमज़ोर होने का एहसास

शुरुआत में हड्डियों के कमज़ोर होने का एहसास बिल्कुल नहीं होता. इसीलिए कई महिलाओं को लगता है कि सब कुछ ठीक है. इसके शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत बाद में दिखाई देते हैं और उन्हें नज़रअंदाज करना आसान होता है जैसे- कद में थोड़ी कमी आना. पीठ में ऐसा दर्द जो आता-जाता रहता है. मामूली-सी चोट या गिरने पर हड्डी टूट जाना. जब तक ये लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक हड्डियों का घनत्व काफी कम हो चुका होता है.

कैल्शियम-विटामिन डी का सेवन अपर्याप्त

एक अध्ययन के अनुसार, भारत में ऑस्टियोपोरोसिस का पता अक्सर तब तक नहीं चल पाता, जब तक कि कोई हड्डी टूट न जाए खासकर 40 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में.  कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन अक्सर अपर्याप्त होता है, खासकर शहरी कामकाजी जीवनशैली में. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान शरीर से कैल्शियम निकलता है. उचित पूर्ति के बिना, हड्डियों में कैल्शियम का भंडार अस्थायी रूप से कम हो सकता है, कभी-कभी अपेक्षा से अधिक समय तक.

वज़न उठाने वाली करें कसरत

35 साल की उम्र के बाद शरीर शायद उतनी तेज़ी से हड्डियां दोबारा न बना पाए, लेकिन फिर भी यह देखभाल का अच्छा जवाब देता है. छोटी-छोटी, लगातार आदतें सचमुच फ़र्क डालती हैं. नियमित रूप से वज़न उठाने वाली कसरत करें- जैसे चलना या योग.  सिर्फ सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि खाने से भी पर्याप्त कैल्शियम लेना चाहिए. प्राकृतिक विटामिन D के लिए रोज़ाना धूप लें. हड्डियों और मांसपेशियों को सहारा देने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग लें.

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