Powerful El Nino 450000 Deaths: जलवायु वैज्ञानिकों के एक नए आकलन में चेतावनी दी गई है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो अगले छह महीनों में दुनिया भर में अतिरिक्त गर्मी के कारण 4.5 लाख से अधिक लोगों की जान ले सकता है. यह अनुमान जलवायु परिवर्तन के चलते पहले से बढ़ रही गर्मी से होने वाली मौतों के अतिरिक्त है. शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने एक बयान जारी कर इस आकलन की जानकारी दी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस असाधारण अल नीनो का प्रभाव इंडोनेशिया, भारत और नाइजीरिया से लेकर अमेरिका तक महसूस किया जा सकता है.
इसके चलते कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी बढ़ने के साथ सूखा, जंगलों में आग और बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है. इन आपदाओं से भी बड़े पैमाने पर जनहानि होने की आशंका जताई गई है.
अलग-अलग क्षेत्रों में मौतों का अनुमान
रिपोर्ट में अतिरिक्त गर्मी के कारण संभावित मौतों का आकलन अलग-अलग क्षेत्रों के लिए किया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस आकलन का उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है, जहां समय रहते तैयारी करके लोगों की जान बचाई जा सकती है. इसके लिए बेहतर गर्मी पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने, शीतलन केंद्र स्थापित करने, अत्यधिक गर्मी के दौरान चिकित्सा सुविधाओं में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है.
वैज्ञानिकों ने घटना की तीव्रता को बताया असाधारण
जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो गया है. इस अतिरिक्त गर्मी का असर ऐसे वैश्विक वातावरण पर पड़ रहा है, जो मानव गतिविधियों के कारण पहले ही गर्म हो चुका है. शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और क्लाइमेट इंपैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन, जो इस आकलन के सह-लेखक हैं, ने कहा कि 4,51,000 संभावित मौतों का अनुमान इतना बड़ा है कि इसे समझना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने इस आंकड़े को माता-पिता, बच्चों, बुजुर्गों, पड़ोसियों और रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोगों से जुड़ा मानवीय नुकसान बताया.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है. इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है. इसके कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तापमान, बारिश और हवाओं के सामान्य पैटर्न में बदलाव आता है. इसका असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता. कुछ इलाकों में अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश, बाढ़ और तूफानों का खतरा बढ़ सकता है. इन बदलावों का प्रभाव कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकती हैं चुनौतियां
मौजूदा अल नीनो ऐसे समय में विकसित हो रहा है, जब मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले ही बढ़ चुका है. वैज्ञानिकों के अनुसार, पहले से गर्म हो रहे वातावरण में अल नीनो से जुड़ी अतिरिक्त गर्मी इसके प्रभावों को और गंभीर बना सकती है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि गर्मी से होने वाली मौतों का यह आंकड़ा किसी निश्चित भविष्यवाणी के बजाय संभावित खतरे का आकलन है. इसका इस्तेमाल सरकारें और स्थानीय प्रशासन जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा समय रहते तैयारी करने के लिए कर सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के प्रभावों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर पूर्वानुमान, प्रभावी तैयारी और जलवायु जोखिमों की समय पर पहचान के जरिए इससे होने वाले मानवीय नुकसान को कम किया जा सकता है.
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