AI Impact Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए कहा कि यह विचारों, नवाचार और इरादों का एक शक्तिशाली संगम था.
पीएम मोदी ने किया पोस्ट
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 विचारों, नवाचार और इरादों का एक शक्तिशाली संगम था.” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इसने वैश्विक भलाई के लिए एआई के भविष्य को आकार देने में भारतीय प्रतिभा की असाधारण क्षमता को प्रदर्शित किया. सबसे बढ़कर, इसने मानव प्रगति के लिए एआई का जिम्मेदारपूर्वक, समावेशी रूप से और व्यापक स्तर पर उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की.”
सोमवार को किया AI Impact Summit 2026 का उद्घाटन
इससे पहले सोमवार को, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ का उद्घाटन किया और कहा कि एआई में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए परिवर्तनकारी समाधानों को आकार देगी बल्कि वैश्विक उन्नति में भी योगदान देगी. पीएम मोदी ने कहा कि नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी उत्साही लोगों के बीच रहने से एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है. प्रधानमंत्री ने आगे कहा था, “हम मिलकर न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी समाधान तैयार करेंगे.”
500 वैश्विक एआई नेता भाग लेने वाले हैं
यह एक्सपो इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित किया जा रहा है, जो ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है और इसमें अभूतपूर्व भागीदारी देखी जा रही है, जिसमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई नेता भाग लेने वाले हैं.
क्या है इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्देश्य
इस बीच, सोमवार से शुरू हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों, मंत्रियों, वैश्विक प्रौद्योगिकी नेताओं, प्रख्यात शोधकर्ताओं, बहुपक्षीय संस्थानों और उद्योग जगत के हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और सतत विकास को सक्षम बनाने में एआई की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके. साथ ही, यह पहली बार है कि इस मुद्दे पर इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक सम्मेलन का आयोजन ग्लोबल साउथ में किया जा रहा है. ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का उद्देश्य एआई के प्रति प्रभाव-उन्मुख और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है, जिसमें मापने योग्य सामाजिक और आर्थिक परिणाम प्रदान करने पर जोर दिया गया है.