Mukul Roy: राजनीतिक जगत से इस वक्त की दुखद खबर सामने आई है. पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और भारत की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मुकुल रॉय ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने 72 साल की उम्र में आखिरी सांस ली है. इस खबर की पुष्टि उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने की है. TMC नेता का रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया. बता दें कि वो लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे.
डिमेंशिया से पीड़ित थे Mukul Roy
दरअसल, मुकुल रॉय लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे. साल 2023 में डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित हैं. उनके ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी. अस्पताल में भर्ती होते समय उनकी हालत काफी खराब थी. पिता के जाने के बाद बेटे शुभ्रांशु ने कहा, ‘वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे.’
कैसा था उनका राजनीतिक सफर
17 अप्रैल 1954 को उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में जन्में मुकुल रॉय ‘राजनीति के चाणक्य’ कहे जाते थे. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा यूथ कांग्रेस से शुरू की थी. फिर 1998 में में उन्होंने मुख्यमंत्री मता बनर्जी के साथ मिलकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना में अपनी अहम भूमिका निभाई. वो ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी रहे और TMC के महासचिव बने. साल 2006 में वो राज्यसभा सदस्य चुने गए.
- साल 2009 से लेकर 2012 तक मुकुल रॉय राज्यसभा में TMC के नेता रहे.
- साल 2012 में मुकुल रॉय मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री बने.
- साल 2011 में TMC की सत्ता में आने के बाद मुकुल रॉय ने पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
- मुकुल रॉय कई CPM और कांग्रेस नेताओं को TMC में लाने में सफल रहे.
- साल 2017 में मुकुल रॉय TMC से अलग होकर नवंबर में भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा में रहते हुए उन्होंने कई TMC नेताओं को पार्टी में लाने में मदद की, जिससे 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बंगाल में 18 सीटें मिलीं.
- साल 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीते, लेकिन जून 2021 में फिर TMC में लौट आए.
- 13 नवंबर 2025 को कलकाता हाईकोर्ट ने दल-बदल कानून के तहत मुकुल रॉय को विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.