भारत को रक्षा क्षेत्र में मिली दो बड़ी उपलब्धि: तीसरी परमाणु पनडुब्बी ‘अरिदमन’ और युद्धपोत ‘तारागिरी’ तैयार

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New Delhi: भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन (S4) और गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी भारतीय नौसेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से इन दो बड़ी उपलब्धियों की जानकारी साझा की. इसी के साथ ही भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा और सामरिक शक्ति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है.

भारतीय नौसेना के लिए मील का पत्थर

भारत अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन को जल्द ही कमीशन करने जा रहा है. रक्षा मंत्री ने इसे ‘शक्ति’ का प्रतीक बताते हुए भारतीय नौसेना के लिए एक मील का पत्थर करार दिया है। अरिदमन उन्नत प्रौद्योगिकी वेसेल (ATV) परियोजना के तहत विकसित तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है.

भारत की क्षमता को अचूक बनाती है अरिदमन

भारत की ‘नो-फर्स्ट-यूज़’ नीति के तहत, यह पनडुब्बी परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी प्रहार करने की भारत की क्षमता को अचूक बनाती है. विशाखापट्टनम शिप बिल्डिंग सेंटर द्वारा निर्मित इस पनडुब्बी का परमाणु रिएक्टर और अधिकांश कलपुर्जे पूरी तरह स्वदेशी हैं. अब अरिहंत और अरिघात के साथ तीसरी पनडुब्बी के आने से भारत समुद्र के भीतर 24×7 रणनीतिक चौकसी रखने में सक्षम होगा.

नौसेना को समर्पित करेंगे तारागिरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापट्टनम में स्वदेश निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोत INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित करेंगे. यह युद्धपोत भारत के पूर्वी समुद्री तट की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. लगभग 6,670 टन वजनी इस युद्धपोत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रडार की पकड़ में आसानी से न आए.

75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग

यह पोत सुपरसोनिक सतह-से-सतह मिसाइलों और आधुनिक पनडुब्बी रोधी प्रणालियों से लैस है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित इस पोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है, जिसमें 200 से अधिक MSMEs का योगदान है. युद्धक अभियानों के अलावा, तारागिरी आपदा राहत और मानवीय सहायता कार्यों के लिए भी पूरी तरह सक्षम है.

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