CMD Upendrra Rai On Aakhil Bhartiya Kavi Sammelan: मध्य प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी इंदौर एक बार फिर साहित्य और शायरी के रंग में सराबोर नजर आया. मंगलवार (24 फरवरी) को शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र नाट्यगृह में ‘प्रजातंत्र मीडिया फाउंडेशन’ की ओर से ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा’ का भव्य आयोजन किया गया. देशभर से आए नामचीन कवि और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
भारत एक्सप्रेस के CMD उपेंद्र राय की खास मौजूदगी
इस बड़े साहित्यिक आयोजन में भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क ने न्यूज पार्टनर के रूप में अहम भूमिका निभाई. कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब नेटवर्क के CMD और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय विशेष रूप से उपस्थित रहे.
उपेंद्र राय ने दिया शायराना संबोधन
उपेंद्र राय ने अपने संबोधन की शुरुआत शायरी से करते हुए साहित्य प्रेमियों का आभार जताया. उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, “कवित विवेक एक नहीं मोरे, सत्य कहूं लिख कागद कोरे.”
उन्होंने बताया कि लिखने-पढ़ने का सिलसिला उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है. वर्ष 1997 में ग्रेजुएशन के पहले साल से उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत की और पिछले 29 वर्षों से लगातार लेखन से जुड़े हैं. उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 15 साल तक सहारा इंडिया मीडिया नेटवर्क में ग्रुप सीईओ और एडिटर-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दीं. इसके अलावा वे स्टार और CNBC जैसे बड़े नेटवर्क्स के साथ भी जुड़े रहे.

भारत एक्सप्रेस का तीन साल का सफर
उपेंद्र राय ने कहा कि ‘भारत एक्सप्रेस’ एक ऐसा चैनल है जिसे एक खांटी पत्रकार ने लॉन्च किया और तीन वर्षों में टीम के सहयोग से इसे मजबूत पहचान मिली. उन्होंने स्वीकार किया कि वे बचपन से कविताएं लिखते रहे, लेकिन अपनी रचनाओं को सहेज कर रखने की आदत नहीं रही. मोबाइल बदलते समय वे अधिकतर डाटा मिटा देते थे, जिससे उनकी हजारों रचनाएं समय के साथ खो गईं.
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हाल के वर्षों में उन्हें एहसास हुआ कि अपनी रचनाओं को संरक्षित रखना जरूरी है. कार्यक्रम के आयोजक हेमंत के आग्रह पर उन्होंने अपनी कुछ पुरानी और नई रचनाएं मंच से साझा करने का निर्णय लिया.

पुरानी दोस्ती और यादगार लम्हे
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में मुंबई पहुंचने के बाद से उनकी और आयोजकों की मित्रता का सफर 26 वर्षों का हो चुका है. “इनकी एक आवाज पर हम नंगे पांव दौड़े चले आते हैं,” कहकर उन्होंने मित्रता की गर्मजोशी को बयां किया.
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1995 में उनकी पहली रचना उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की पत्रिका में प्रकाशित हुई थी, जिसे हाल ही में उनकी सोशल मीडिया टीम ने ढूंढकर उन्हें भेजा. उस क्षण को याद करते हुए उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की.
अंत में उन्होंने मशहूर शायर वसीम बरेलवी के एक शेर का जिक्र करते हुए कहा कि एक बड़ा न्यूज चैनल चलाना “कई सफेद हाथियों को पालने जैसा” है- जिम्मेदारियों से भरा, लेकिन संतोष देने वाला सफर.
कवि सम्मेलन और मुशायरे में देर रात तक काव्य और शायरी की गूंज सुनाई देती रही. इंदौर की फिजाओं में साहित्य का यह उत्सव लंबे समय तक याद किया जाएगा.

