रिटायरमेंट के बाद राजनीति को लेकर जस्टिस गवई ने स्पष्ट किया रूख, बाले- स्वीकार नहीं करूंगा…

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Justice BR Gavai Retirement : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) का पद संभालने के बाद अब जस्टिस बीआर गवई रिटायर हो गए हैं. बता दें कि उनके रिटायर होने के बाद नए सीजेआई सूर्यकांत पद संभाल चुके हैं. ऐसे में इस अवसर पर जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी यात्रा पर खुलकर बात की और रिटायरमेंट के बाद उन्‍होंने राजनीति में आने की अटकलों पर भी खुलकर जवाब दिया. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रहते हुए जस्टिस गवई 330 ज्यादा फैसलों में शामिल रहे हैं.

इसके साथ ही अपने रिटायरमेंट के बाद जस्टिस गवई ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक इंटरव्‍यू में उनसे पूछा गया कि आपने कहा था कि आप रिटायरमेंट के बाद जॉब नहीं लेंगे. तो क्या ऐसे में संभावना हैं कि आप राजनीति में आ सकते हैं? इस दौरान उन्‍होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल मैंने इसके बारे में नहीं सोचा है. मैं बस अभी शांति में हूं. उन्‍होंने ये भी मैंने अभी कोई फैसला नहीं किया है और यहीं मानता हूं कि आपको आज के हिसाब से जीना चाहिए.

राज्यसभा में नॉमिनेटेड होना स्वीकार नहीं करूंगा

इतना ही नही बल्कि उन्होंने ये भी कहा कि ‘जहां तक मुझे लगता है, मैं किसी भी ट्रिब्यूनल के प्रमुख का पद स्वीकार नहीं करूंगा और न ही किसी गवर्नर का पद स्वीकार नहीं करूंगा. साथ ही मैं राज्यसभा में नॉमिनेटेड होना भी स्वीकार नहीं करूंगा. क्‍योंकि इसे लेकर मैं बहुत साफ हूं.’

जस्टिस सूर्यकांत ने स्थापित किया नया प्रक्रियात्मक मानदंड

जानकारी के मुताबिक, भारत के चीफ जस्टिस के रूप में पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने एक नया प्रक्रियात्मक मानदंड स्थापित किया और कहा कि तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मामलों का जिक्र लिखित रूप में किया जाना चाहिए. इसके साथ ही मृत्युदंड और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मामलों की परिस्थितियों को लेकर मौखिक अनुरोधों पर विचार किया जाएगा. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने पहले ही दिन 17 मामलों पर लगभग 2 घंटे तक सुनवाई की.

जस्टिस गवई ने फिर से शुरू की ये प्रथा

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने शीर्ष अदालत में मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मौखिक प्रथा को रोक दिया था. बता दें कि न्यायमूर्ति खन्ना के बाद इस पद पर आए जस्टिस गवई ने इसे फिर से शुरू कर दिया था. बताया जा रहा है कि आमतौर पर कई बार वकील चीफ जस्टिस के सामने मामलों का मौखिक रूप से जिक्र करते हैं, ताकि उन्हें तत्काल सूचीबद्ध किया जा सके.

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