‘हमारी विविधता हमारी पहचान रहे और सहयोग हमारी प्रेरणा बने’, BRICS  समिट में गूंजा PM मोदी का संदेश

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

BRICS Summit 2026: BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखा. उन्होंने कहा कि BRICS की सबसे बड़ी ताकत उसके सदस्य देशों की विविधता और उनके बीच बढ़ता आपसी सहयोग है.

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अलग-अलग देशों की अपनी पहचान और परिस्थितियां होने के बावजूद साझा प्रयासों के जरिए वैश्विक विकास को नई दिशा दी जा सकती है. उन्होंने कहा, “हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के कल्याण का माध्यम बने.”

PM मोदी ने गिनाईं BRICS Summit 2026 की पहल

पीएम मोदी ने BRICS देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए संगठन के तहत की गई विभिन्न पहलों और उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रोजगार क्षमता बढ़ाने, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. पीएम मोदी ने बताया कि छोटे और मझोले उद्यमों को ज्ञान, वित्तीय संसाधनों और नए बाजारों से जोड़ने के लिए BRICS MSME कॉर्पोरेशन पोर्टल की पहल की गई है. इसके अलावा, अलग-अलग शहरों के बीच सफल मॉडल और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने के उद्देश्य से ‘BRICS Urban Mobility Hub’ की स्थापना भी की गई है. उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें BRICS देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

पर्यावरण और विकास पर PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर भारत की सोच सामने रखी. उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है और सदियों से देश में यह मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं. BRICS के मंच से पीएम मोदी ने कहा कि संगठन के स्तर पर भी मानव विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी गई है. उन्होंने इसे सतत विकास यानी सस्टेनेबिलिटी की बुनियाद बताते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में BRICS के तहत कई अहम पहलों पर काम हुआ है और आगे भी पर्यावरण के साथ विकास को संतुलित रखते हुए सहयोग को बढ़ाने की जरूरत है.

पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का काम करेंगे

उन्होंने कहा कि स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए BRICS डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है. उन्होंने कहा कि यह पहल स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को ज्यादा भरोसेमंद, प्रभावी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाने में मदद करेगी. पीएम मोदी ने बताया कि एग्रो-इकोलॉजी और रीजनरेटिव एग्रीकल्चर के लिए बनाए गए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का काम करेंगे. वहीं, समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के लिए तैयार किए गए सिद्धांतों के जरिए स्थानीय और स्वदेशी ज्ञान को जलवायु कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है.

BRICS ने समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश की

उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के जरिए BRICS ने समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश की है. पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि BRICS में विकसित समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के मुताबिक अपनाने योग्य और सभी के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए.

ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है

इस दौरान पीएम (BRICS Summit 2026) ने कहा, “मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि ब्रिक्स में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है, और सॉल्यूशंस उनके लिए ही नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं. ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है.” उन्होंने अंत में कहा क‍ि हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए.

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