आचार्य लोकेश मुनि की अमेरिका-कनाडा यात्रा में महावीर का अंहिसा संदेश, गूंजा भारत की आत्मा का स्वर

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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आचार्य लोकेश मुनि इन दिनों अमेरिका और कनाडा की यात्रा पर हैं. दुनिया को भगवान महावीर की अहिंसा और अनेकांत की सीख से जोड़ना उनका मकसद है. एक टेलीविजन को दिए इंटरव्यू उन्होंने कहा कि “मैं यात्रा पर पिछले सप्ताह से हूं और पहला कार्यक्रम जेना कन्वेंशन अमेरिका में 72 जैन सेंटर हैं और उन सभी सेंटरों का दो वर्ष में एक बार महा अधिवेशन होता है.
इस बार का महा अधिवेशन तीन से छ जुलाई तक शिकागो में था और वहां पर पांच से 7000 लोग चार दिन तक एक साथ रहे. अमेरिका के शिकागो में हुए 72 जैन सेंटरों के अधिवेशन में उन्होंने बताया, कैसे महावीर का दर्शन आज भी उतना ही जरूरी है, जितना 2600 साल पहले था.”

अमेरिका-भारत संबंध पर क्या कहा ?

उनका मानना है कि भारत और अमेरिका, दोनों बड़े लोकतांत्रिक देश हैं. अगर ये साथ आकर हिंसा, आतंक और गरीबी के खिलाफ मिलकर काम करें, तो पूरी दुनिया को फायदा हो सकता है.

दीक्षा से लेकर विश्व मंच तक

राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा कस्बे से निकलकर आचार्यजी ने 1983 में आचार्य तुलसीजी से दीक्षा ली. फिर 20000 किमी की पैदल यात्राओं के जरिए उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों को फैलाने का काम किया था.

दीक्षा के अलग-अलग पहलू

आचार्य लोकेशजी ने दीक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की. जिनमें बाल दीक्षा, वृद्ध दीक्षा, और स्वयं की दीक्षा शामिल हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि सही समय पर दीक्षा लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह बातचीत उनके दर्शन और आध्यात्मिक विचारों को समझने में मदद करती है.

योग भारत की अमूल्य विरासत- आचार्य लोकेश जी

इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि “संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उन्होंने योग की प्राचीनता को जैन परंपरा से जोड़ते हुए बताया कि महावीर समेत सभी तीर्थंकरों की प्रतिमाएं ध्यान की मुद्रा में होती हैं. ये हजारों साल पुरानी हैं और यही बताती हैं कि योग भारत की आत्मा है.”

अमेरिकी अवॉर्ड और वैश्विक मंच पर सम्मान

शांति और सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए आचार्य लोकेश जी को अमेरिकी प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड मिला. यह अवार्ड उनके शांति और सद्भावना के लिए किए गए कार्यों के लिए दिया गया है. न्यूयॉर्क, ओटावा, वैंकूवर और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में स्थानीय नेताओं से संवाद के जरिए उन्होंने विश्व शांति की बात रखी.

योग भारत की हजारों वर्ष पुरानी विरासत

आचार्यजी ने संयुक्त राष्ट्र मंच पर ध्यान केंद्रित प्रतिमाओं द्वारा यह प्रमाणित किया कि योग भारत की हजारों वर्ष पुरानी विरासत है. महावीर की प्रतिमाएं ध्यान और समाधि की अवस्था में हैं, जो भारत के आध्यात्मिक चिंतन की गहराई दर्शाती हैं.

महापुरुषों का संदेश

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि “उनका संदेश साफ है कि जैसे सूरज की रोशनी, पेड़ के फल और नदी का पानी सबके लिए होते हैं, वैसे ही महापुरुषों की बातें भी सबके लिए होती हैं. अगर हम महावीर के विचारों को दुनिया तक पहुंचाएं, तो यह न केवल भारत की विरासत को सम्मान देगा बल्कि पूरी दुनिया को एक खूबसूरत दिशा देगा.”
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