राष्ट्रीय एकता का समागम: एसएमवीडी यूनिवर्सिटी कटरा में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ समारोह में देशहित में दिलाई गई शपथ

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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New Delhi: राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय के संकल्प को मूर्त रूप देते हुए ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ समारोह का आयोजन आज श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) कटरा के प्रांगण में भव्य रूप से संपन्न हुआ. भारत भारती संगठन के तत्वावधान में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं नवचेतना स्वाभिमान चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे प्रमुख चर्चा रही भारत भारती के उत्तर भारत प्रभारी मोहम्मद इरफ़ान अहमद का ओजस्वी संबोधन और उनके द्वारा दिलाई गई राष्ट्र-नागरिकता की शपथ.
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में इरफ़ान अहमद ने अपने संबोधन में सीधे जन-जन की भावना को छुआ. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय करके भारत को एक सूत्र में पिरोया था, आज हम सबका दायित्व है कि हम उस एकता को मजबूत करें, न कि उसे संकीर्णताओं में बांटें. उनका संबोधन देशभक्ति की ऐसी लहर लेकर आया कि पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा.
लेकिन इस समारोह का सबसे मार्मिक और प्रेरक क्षण वह था जब इरफ़ान अहमद ने मंच संभाला और उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों, विद्वानों, कलाकारों और विशेष रूप से युवाओं को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराया. उन्होंने कठिन राजनीतिक शब्दावली का सहारा न लेते हुए, आम आदमी की जुबान में कहा, “एक अच्छा नागरिक बनने के लिए बड़े-बड़े भाषणों की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कर्मों की जरूरत होती है.”
इसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से उपस्थित विशाल जनसमूह को शपथ दिलाई. यह शपथ सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक जीवन-मूल्य बन गई. उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे जल और बिजली के संरक्षण का व्रत लें, यातायात के नियमों का पालन अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाएं, अपने आस-पास सफाई रखना अपना फर्ज समझें और समाज में आपसी सहयोग की भावना का प्रसार करें. उन्होंने युवा पीढ़ी को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान ही सच्ची शिक्षा की पहचान है. उनका यह ओजस्वी संबोधन और शपथ ग्रहण समारोह के केंद्र में रहा, जिसने राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि गुजरात से आए प्रोफ़ेसर डॉ. रिजवान क़ादरी, सदस्य प्रधानमंत्री संग्रहालय भारत सरकार ने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला.
एसएमवीडीयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रगति कुमार ने छात्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया. विशिष्ट अतिथियों में भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री विनय पात्रले एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जगन्नाथ कुंजबिहारी स्वाइन (डायरेक्टर, नव चेतना फाउंडेशन) ने भी सरदार पटेल और वंदे मातरम पर अपने विचार रखे. इसके साथ ही, समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित भी किया गया.
डॉ. अनीशा तिवारी (पशु चिकित्सा), अंजू बंसल (शिक्षा), इंजीनियर अशोक सिंह (कला एवं संस्कृति), अधिवक्ता रमांश बिल्लावरिया (सामाजिक न्याय), प्रकाशचंद अहिरवार (सामुदायिक सेवा), गौधाम कीरियां (गो-संरक्षण), राजिंदर प्रसाद कक्कड़ (व्यापार), डॉ. कुलदीप रैना (कला एवं सांस्कृतिक एकीकरण) और प्रो. एम.ए. वानी (शिक्षा) को उनकी गौरवपूर्ण उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम का सफल संचालन भारत भारती जम्मू की अध्यक्ष विजया गुप्ता एवं उनकी पूरी टीम ने किया. समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने इरफ़ान अहमद के दिए संदेश को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, एकजुट और प्रगतिशील भारत के निर्माण का संकल्प लिया. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रो. कुलभूषण मोहोत्रा, रोमेश खजूरिया, पवन विवेक, डॉक्टर सुनील राजपूत, प्रोफ़ेसर रणविजय सिंह, निधि शर्मा डोगरा, एडवोकेट तबस्सुम रहीम, एजाज इलाही आदि ने भाग लिया.
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