भ्रामक विज्ञापन मामले में रामदेव को थोड़ी राहत, जानिए आज की सुनवाई में क्या हुआ?

Abhinav Tripathi
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Sub Editor, The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Patanjali Ad Case: पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में आज यानी मंगलवार को देश के शीर्ष न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में सुनवाई हुई. आज की इस सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण कोर्ट में मौजूद रहे. इस भ्रामक विज्ञापन मामले की सुनवाई के दौरान योगगुरु रामदेव की तरफ से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने देश शीर्ष न्यायालय को बताया कि पतंजलि ने जो माफीनामा पेपर में दिया था, उसे रजिस्ट्री में जमा करा दिया गया है.

वहीं, मुकुल रोहतगी कोर्ट को अखबार में छपे माफीनामे को भी दिखाया. इस दौरान कोर्ट ने पूछा कि सब कुछ ई फाइलिंग क्यों की गई. इसका ओरिजिनल रिकॉर्ड कहां है. जिससे पता लगाया जा सके की आखिर विज्ञापन की साइज क्या थी.

जानिए कोर्ट ने क्या कहा?

आज की सुनवाई के दौरान रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को अखबार में छपे माफीनामे को दिखाया तो कोर्ट ने पूछा कि आपने ओरिजनल रिकॉर्ड क्यों नहीं दिए, आपने ई फाइलिंग क्यों की? यह बहुत ज्यादा कन्फ्यूजिंग है और हम अपने हाथ खड़े कर रहे हैं. इसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि हो सकता है कि मेरी अज्ञानता के कारण ऐसा हुआ हो. वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पिछली बार जो माफीनामा छापा गया था, वो छोटा था और उसमें केवल पतंजलि लिखा था, लेकिन दूसरा बड़ा है. इसके लिए हम प्रशंसा करते हैं कि उनको (रामदेव) यह बात समझ में आई.

IMA पर SC सख्त

आज की सुनावई के दौरान योगगुरु रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी ने आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष के बयान का भी जिक्र किया. दरअसल, इस बयान में उन्होंने पतंजलि के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी. मुकुल रोहतगी ने यह भी बताया कि आखिर आईएमए चीफ ने क्या कहा था. इस पर एससी ने सख्ती दिखाई और आईएमए के अध्यक्ष का बयान रिकॉर्ड में लाने की बात कही. इसी के साथ कोर्ट ने यह भी कहा कि ये मामला काफी गंभीर है और इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें.

कोर्ट से रामदेव को राहत

वहीं, इस सुनवाई के दौरान योगगुरु रामदेव की ओर से पेश वकील ने अगली सुनवाई में रामदेव और बालकृष्ण के पेशी से छूट मांगी. इसपर कोर्ट ने थोड़ी नरमी दिखाई और अगली सुनावई के दौरान रामदेव को पेशी से छूट दे दी है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि केवल अगली सुनवाई के दौरान ये छूट दी जानी है.

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