Mussoorie: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों ने संतुलित और बिना किसी उकसावे के जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान व Pok में आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया था, लेकिन पड़ोसी देश के दुर्व्यवहार के कारण ही सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं हो पाई. राजनाथ सिंह शनिवार को मसूरी में ट्रेनी प्रशासनिक अफसरों को संबोधित कर रहे थे.
वीर सैनिकों की तरह सदैव तैयार रहने का आह्वान
इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता, सिविल सर्वेंट्स के इस विषम परिस्थिति में योगदान और साझा प्रयास की बात कही. रक्षा मंत्री ने युवा नागरिक सेवकों (सिविल सर्वेंट्स) से राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझने और वीर सैनिकों की तरह ही ऐसी कठिन परिस्थितियों के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया.
ऑपरेशन सिंदूर नागरिक-सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक-सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक मशीनरी ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण सूचनाओं का संचार किया और जनता का विश्वास जीता. रक्षा मंत्री ने 29 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए.
2047 तक देश को विकसित भारत बनाने पर बल
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों की वीरता और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की. कहा कि उन्होंने महत्वपूर्ण सूचनाओं का संचार किया और देश भर में मॉक ड्रिल का सफल संचालन सुनिश्चित किया. रक्षा मंत्री ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया.
गति देने में नागरिक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन और सुधार, प्रदर्शन एवं परिवर्तन के मंत्र का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में नागरिक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2014 में हमारी सरकार बनी थी, तब आर्थिक आकार के मामले में भारत 11वें स्थान पर था. पिछले 9-10 वर्षों मेंए हम चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं. यहां तक कि मॉर्गन स्टेनली जैसी अत्यधिक प्रतिष्ठित वित्तीय फर्म भी अब कहती है कि भारत अगले दो-तीन वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
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