पोंगल सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परंपरा, मेहनत और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है. यह पर्व तमिल संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है, जहां श्रम, परिवार और समाज एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं. इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री ने देशवासियों, खासकर तमिल समुदाय को पोंगल की शुभकामनाएं दीं.
श्रम व प्रकृति के चक्र के बीच घनिष्ठ संबंध
पीएम मोदी ने पोंगल के आनंदमय अवसर पर अपने संदेश की शुरुआत “वणक्कम” कहकर की और देशवासियों तथा उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. अपने पत्र में उन्होंने पोंगल को ऐसा पर्व बताया जो मानवीय श्रम और प्रकृति के चक्र के बीच के घनिष्ठ संबंध की याद दिलाता है. उन्होंने कहा कि यह त्योहार कृषि, मेहनती किसानों, ग्रामीण जीवन और श्रम के सम्मान से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो भारत की आत्मा को मजबूत बनाता है.
पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव का पर्व
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पोंगल केवल खेतों और फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव का भी पर्व है. इस दिन परिवार एक साथ मिलकर पारंपरिक पकवान बनाते हैं, खुशियां साझा करते हैं और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर पीढ़ियों के बीच के रिश्तों को मजबूत करते हैं और समाज में एकजुटता की भावना को बढ़ावा देते हैं. साथ ही पोंगल उन सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर है, जो अपनी कड़ी मेहनत से हमारे जीवन को समृद्ध बनाते हैं.
तमिल हमारे देश की अमूल्य धरोहर
पीएम मोदी ने अपने संदेश में तमिल परंपराओं की समृद्धि का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, पोंगल तमिल संस्कृति का एक चमकता हुआ प्रतीक है और भारतवासियों को इस बात पर गर्व है कि दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक तमिल हमारे देश की अमूल्य धरोहर है. यह भाषा और संस्कृति न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान के साथ पहचानी जाती है.
पीएम ने यह देखकर खुशी जताई कि पोंगल अब एक वैश्विक त्योहार के रूप में उभर रहा है. तमिलनाडु और भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ दुनिया भर में बसे तमिल समुदाय इसे समान उत्साह और गर्व के साथ मना रहे हैं. अपने संदेश के अंत में उन्होंने कामना की कि पोंगल का यह पर्व हर किसी के जीवन में समृद्धि, सफलता और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए.

