‘ज्ञान भारतम’ मिशन क्या है? मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया PM मोदी का मेगा प्लान; 50 लाख पांडुलिपियां होंगी डिजिटल

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bharat Express Mega Conclave 2026: नए भारत के निर्माण में हमारे पूर्वजों का ज्ञान एक अहम भूमिका निभाने जा रहा है. इसका विस्तृत खाका ‘भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क’ के तीसरे स्थापना दिवस पर आयोजित मेगा कॉन्क्लेव ‘विकसित भारत 2047: नए भारत की बात’ में सामने आया.

इस मंच पर भारत एक्सप्रेस के सीएमडी उपेंद्र राय के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘ज्ञान भारतम’ मिशन के बारे में देशवासियों को विस्तार से जानकारी दी और बताया कि कैसे भारत के लुप्त हो रहे प्राचीन ज्ञान को फिर से जीवित किया जा रहा है.

‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ा रही सरकार

भारत एक्सप्रेस के एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने जब देश के विभिन्न मठों और संस्थानों में मौजूद अथाह ज्ञान और पांडुलिपियों के संरक्षण का मुद्दा उठाया, तो मंत्री शेखावत ने बताया कि इस दिशा में पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने पहल की थी. उस समय ‘मैनुस्क्रिप्ट मिशन’ के जरिए एक कैटलॉग बनाने की शुरुआत हुई थी. लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे एक ‘मिशन मोड’ में लिया गया है. इसे ‘ज्ञान भारतम’ नाम दिया गया है, जिसके तहत देश भर में बिखरी इन धरोहरों को सहेजने का युद्धस्तर पर काम चल रहा है.

भोजपत्र पर छिपे ज्ञान की हो रही खोज

मंत्री शेखावत ने बताया कि देश के मठों, मंदिरों और विश्वविद्यालयों में लाखों की संख्या में प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं. पेड़ की छाल, भोजपत्र और हाथ से बने सिल्क के कागज पर खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) से लेकर कृषि और स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों पर अथाह ज्ञान लिखा गया है. सरकार ने अब तक लगभग 50 लाख से ज्यादा ऐसी पांडुलिपियों की पहचान कर ली है. इस विशाल कार्य को गति देने के लिए सरकार ने 27 से ज्यादा विभिन्न संगठनों के साथ एमओयू (MOU) साइन किए हैं, ताकि संरक्षण का यह काम बिना किसी रुकावट के तेजी से पूरा हो सके.

भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव के मंच पर हुई इस गंभीर चर्चा ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को लेकर कितना सजग है. ‘ज्ञान भारतम’ मिशन केवल पुराने कागजों को सहेजने का काम नहीं है, बल्कि यह उस सामूहिक ज्ञान को उजागर करने का प्रयास है जो सदियों से उपेक्षित पड़ा था. कॉन्क्लेव में उठा यह मुद्दा बताता है कि 2047 का विकसित भारत अपनी प्राचीन बौद्धिक संपदा की नींव पर ही खड़ा होगा.

यह भी पढ़े: ‘सुश्रुत संहिता’ का ज्ञान वो भी फ्रेंच में…; मैक्रों हो गए मंत्रमुग्ध; मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सुनाया किस्सा

Latest News

इस्लामाबाद के खिलाफ लगातार प्रदर्शन जारी, रावलाकोट में जुटे 50 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी

Protest in PoK: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में विरोध प्रदर्शन थमने का नाम ही नही ले रहा...

More Articles Like This