Makar Sankranti: गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त में चार बजे गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ को विधि-विधान से आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई. इस अवसर पर उन्होंने शिवावतार महायोगी से लोकमंगल, सभी नागरिकों के सुखमय-समृद्धमय जीवन की कामना की.
महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों, संतों और श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की बधाई और शुभकामनाएं दी. इस अवसर पर मीडियाकर्मियों से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि बुधवार से ही पूरे प्रदेश में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र धर्म स्थलों पर जाकर आस्था को नमन कर रहे हैं. गोरखपुर में बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने महायोगी भगवान गोरखनाथ जी को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई. लाखों श्रद्धालुओं ने प्रयागराज के संगम में आस्था की पवित्र डुबकी भी लगाई. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिलसिला लगातार आज गुरुवार को भी जारी है.
#WATCH | Gorakhpur | Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath offers Khichdi as prasadam at the Gorakhnath Temple on the occasion of Makar Sankranti. pic.twitter.com/fOzuj9nunc
— ANI (@ANI) January 14, 2026
बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाना मेरा सौभाग्यः सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गुरुवार को गोरखपुर में भगवान गोरखनाथ जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन पंक्ति में लगकर श्रद्धापूर्वक खिचड़ी चढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी प्रातः 4 बजे गोरखनाथ मंदिर की विशिष्ट पूजा संपन्न होने के उपरांत भगवान गोरखनाथ को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने बताया कि गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने आए हुए हैं.
वास्तव में सूर्यदेव इस जगत की आत्मा है
सीएम योगी ने कहा कि मकर संक्रांति भारत के पर्व और त्योहारों की परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. वास्तव में सूर्यदेव इस जगत की आत्मा हैं. जगतपिता सूर्य की उपासना का यह पर्व हर प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए प्रशस्ति तिथि माना जाता है. आज के बाद से सनातन धर्म की परंपरा में सभी मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूर्य का जो अयनवृत्त है, ज्योतिषी परंपरा के अनुसार, वह 12 विभिन्न भागों में विभाजित है. एक राशि से दूसरे राशि में सूर्यदेव के संक्रमण को संक्रांति कहा जाता है और जब धनु राशि से मकर राशि में भगवान सूर्य का संक्रमण होता है तो यह मकर संक्रांति कहलाता है. मकर राशि से अगले छह माह तक यानी मिथुन राशि तक सूर्य भगवान उत्तरायण रहेंगे. उत्तरायण का जो समय होता है, उसमें दिन बड़े और रात्रि छोटी होती है. जीवंतता के लिए सूर्य का प्रकाश कितना महत्वपूर्ण है और भारत की ऋषि परंपरा ने इसे कितना महत्व दिया है, इसका अनुमान इव पर्व के माध्यम से लगाया जा सकता है.

