लहुरी काशी की धरती पर जगी साहित्य की लौ, जम्मू कश्मीर के LG मनोज सिन्हा और भारत एक्सप्रेस के CMD उपेंद्र राय ने किया लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य आगाज

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Ghazipur Literature Festival inauguration: गाजीपुर की ऐतिहासिक धरती शनिवार को साहित्य, संस्कृति और संवाद के रंगों से सराबोर हो गई. साहित्य, संस्कृति और निर्मलता की विरासत को समर्पित गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का शुभारंभ पूरे शान के साथ किया गया. इस महोत्सव का शुभारंभ भारत एक्सप्रेस के सीएमडी और एडिटर इन चीफ उपेंद्र राय, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राज्यसभा सांसद संगीता बलवंत और दक्षिण अफ्रीका के हाई कमिश्नर प्रोफेसर अनिल सोकलाल ने संयुक्त रूप से किया.
उद्घाटन समारोह में गाजीपुर के लोगों का जोश देखते ही बनता था. देश-विदेश से आए विद्वानों, साहित्यकारों, कलाकारों और युवा प्रतिभाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिया. सभागार में एक तरफ साहित्य की गंभीरता थी, तो दूसरी ओर गाजीपुर की मिट्टी की वह खुशबू जो हर आगंतुक को अपनापन देती है.

भोजपुरी में प्रस्तुत की गई वंदना

फेस्टिवल का माहौल उस वक्त और अधिक सांस्कृतिक हो उठा जब भोजपुरी में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई. इस कीर्तन ने आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों रंगों से भर दिया. स्थानीय लोगों ने तालियों के साथ मंच पर मौजूद अतिथियों का स्वागत किया.

गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल के ये हैं आयोजक

गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल डायलॉग इंडिया और भारत एक्सप्रेस की संयुक्त पहल है. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीएमडी उपेंद्र राय ने कहा कि गाजीपुर सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि सदियों से ज्ञान और संवाद की जीवंत प्रयोगशाला रहा है. उन्होंने कहा कि गाजीपुर हमेशा से साहित्य और विचारों की भूमि रही है. यह फेस्टिवल उसी परंपरा को आधुनिक भाषा देता है और नई पीढ़ी को बताता है कि गाजीपुर की बौद्धिक धरोहर कितनी समृद्ध है.
फेस्टिवल में विभिन्न साहित्यिक चर्चाओं, संवाद सत्रों, कवि सम्मेलनों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और युवा क्रिएटर्स के लिए विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला रखी गई है. इस फेस्टिवल का उद्देश्य यह है कि गाजीपुर न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे देश में साहित्यिक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित हो.
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