क्या है बहादुर और कायर का फर्क? CMD उपेंद्र राय ने प्रयागराज में समझाया, बताया इंसानियत का गणित

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

प्रयागराज की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरती आज न केवल ज्ञान के एक नए केंद्र ‘कैलाश गौतम स्मृति पुस्तकालय’ की साक्षी बनी, बल्कि भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क के सीएमडी एवं एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय के दार्शनिक विचारों से भी सराबोर हुई. मेजा रोड स्थित श्री काशी प्रसाद सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज के मंच से संबोधित करते हुए उपेंद्र राय ने ‘इंसानियत’ और ‘मुकम्मल इंसान’ होने की एक ऐसी परिभाषा दी, जिसने वहां मौजूद जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया.

CMD उपेंद्र राय ने समझाया इंसानियत का गणित

अपने संबोधन में उपेंद्र राय ने जीवन की सार्थकता को चार हिस्सों में बांटते हुए एक मुकम्मल इंसान का खाका खींचा. उन्होंने कहा कि 100% इंसान वही है जो इन चार पैमानों पर खरा उतरता है.

पीड़ा हरने की यात्रा (25%)

कार्ल मार्क्स का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इंसान वही है जो दूसरे की पीड़ा दूर करने के लिए दो कदम चले. उन्होंने समाज की संकीर्ण सोच पर तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ परंपराओं और सुनी-सुनाई बातों पर चलना ‘अनपढ़’ होने की निशानी है. असली खोज वह है जब आप किसी जरूरतमंद की मदद के लिए आगे बढ़ते हैं.

निस्वार्थ मदद (25%)

उपेंद्र राय ने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति अपने प्रयासों और अपने संसाधनों (पैसे) से दूसरों की मदद करता है, वह 25% और मुकम्मल हो जाता है. उनके अनुसार, मदद की भावना ही इंसान को भीड़ से अलग करती है.

टूट कर प्यार’ करने का साहस (25%)

संबोधन का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब उन्होंने प्रेम और समर्पण की बात की. उन्होंने कहा, “अगर आपने अपनी जिंदगी में किसी से टूट कर प्यार न किया हो और ट्रैफिक में गाड़ी फंसने पर पैदल न चल दिए हों, तो आपने जीवन को जाना ही नहीं. दुनिया का सारा साहित्य इसी समर्पण के इर्द-गिर्द है.”

दिल टूटने की गहराई (25%)

मुकम्मल इंसानियत का अंतिम 25% उन्होंने ‘दिल टूटने’ और उसके बाद आने वाली गहराई को दिया. उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक क्रौंच पक्षी के जोड़े की पीड़ा ने एक डाकू को महर्षि बना दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया का 98% साहित्य इसी ‘घाव’ और ‘गहराई’ पर लिखा गया है.

बहादुरी और कायरता पर बेबाक बोल

उपेंद्र राय ने समाज में बहादुरी की प्रचलित परिभाषा को भी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि बहादुर वह नहीं जिसे डर न लगे, बल्कि बहादुर वह है जो डरने के बावजूद रिस्क उठाता है और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है. उन्होंने रिस्क लेने की क्षमता को जीवन की सबसे बड़ी जांबाजी बताया.

Latest News

सपने में खुद की शादी देखना क्या होता है? खुशियों का आना या होने वाले अपशकुन का इशारा

Seeing a wedding in a dream : कई बार हमें ऐसे सपने आते हैं जो बार-बार दोहराते हैं और...

More Articles Like This