New Delhi: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ममता बनर्जी को बेहद तगड़ा झटका लगा है. चुनाव आयोग द्वारा किए गए IAS और IPS अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों के खिलाफ ममता सरकार की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार करते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे अलोकतांत्रिक और पक्षपाती बताया था.
चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं तबादले
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया. बेंच ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान तबादले चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और यह एक स्थापित प्रक्रिया है. ममता सरकार की अर्जी खारिज होते ही बंगाल में सियासी पारा चढ़ गया है. विपक्ष ने इसे संविधान की जीत बताया है, वहीं राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
सभी राज्यों के लिए एक नजीर
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि उन सभी राज्यों के लिए एक नजीर है जहां चुनाव के दौरान आयोग अधिकारियों को हटाता या बदलता है. कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान आयोग के प्रशासनिक फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश बेहद कम है.
राज्य सरकार ने जताई थी कड़ी आपत्ति
चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी (DGP) सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाकर नए चेहरों की तैनाती की थी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. 15 मार्च को चुनाव परिणामों की घोषणा (या चुनाव कार्यक्रम के सक्रिय होने) के बाद जिस तरह से बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल हुआ था, उसे लेकर राज्य सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी. शीर्ष अदालत ने इन दलीलों को सुनने के बाद याचिका को टिकने लायक नहीं माना.
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