Tamil Nadu Cancer Cases 2025: एक लाख के पार नए मामले, बढ़ते आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

तमिलनाडु में साल 2025 के दौरान कैंसर के एक लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2025 में कुल 1,00,097 नए कैंसर केस सामने आए हैं. यह आंकड़ा बीते वर्षों की तुलना में मामलों में लगातार और तेज बढ़ोतरी की ओर इशारा करता है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने रोकथाम, शुरुआती जांच और उपचार व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है.

पिछले पांच सालों से लगातार बढ़ रहे मामले

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मजबूत स्क्रीनिंग प्रोग्राम और लाइफस्टाइल में बदलाव के बिना आने वाले वर्षों में कैंसर के मामलों में और इजाफा हो सकता है. पिछले पांच सालों से यह बढ़ता हुआ ट्रेंड लगातार बना हुआ है. सालाना रजिस्ट्रेशन 2020 में 68,750 मामलों से बढ़कर 2021 में 76,968, 2022 में 89,265, 2023 में 92,816 और 2024 में 96,486 तक पहुंच गया. वहीं 2025 में यह आंकड़ा एक लाख के पार चला गया है. यह स्थिति बढ़ते बीमारी के बोझ और सभी जिलों में मिलकर प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की तुरंत जरूरत को दर्शाती है.

महिलाओं में ज्यादा मामले, चेन्नई सबसे आगे

2025 में सामने आए कुल नए कैंसर मामलों में से 53,542 मरीज महिलाएं थीं, जबकि 46,555 पुरुष बताए गए हैं. फिलहाल तमिलनाडु में कैंसर के साथ जीवन यापन कर रहे मरीजों की कुल संख्या 1,09,097 तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा जहां एक ओर बढ़ते मामलों को दर्शाता है, वहीं बेहतर इलाज और सर्वाइवल रेट की ओर भी संकेत करता है, जिसके लिए निरंतर मेडिकल सपोर्ट की जरूरत बनी हुई है.

जिलावार आंकड़ों की बात करें तो चेन्नई में सबसे अधिक 8,505 नए मामले दर्ज किए गए हैं. इसके बाद कांचीपुरम में 7,295 और वेल्लोर में 6,525 नए केस सामने आए हैं.

शहरी इलाकों में बढ़ते खतरे

विशेषज्ञों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में कैंसर के मामलों की अधिक संख्या के पीछे लाइफस्टाइल से जुड़े जोखिम, प्रदूषण, मानसिक तनाव और बीमारी की देर से पहचान जैसे कारण प्रमुख हैं. कैंसर के पैटर्न में जेंडर के आधार पर भी स्पष्ट अंतर देखा जा रहा है. पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे आम है, जिसका मुख्य कारण तंबाकू का सेवन माना जाता है. इसके बाद कोलोरेक्टल और पेट के कैंसर के मामले सामने आते हैं. वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे अधिक पाया जाता है, जबकि सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर के मामलों की संख्या भी चिंताजनक है. यह स्थिति व्यापक जागरूकता और नियमित सामुदायिक स्क्रीनिंग कार्यक्रमों की जरूरत को रेखांकित करती है.

लेट डिटेक्शन और मौतों के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के करीब आधे मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं, जिससे मरीज के बचने की संभावना कम हो जाती है और इलाज का खर्च भी काफी बढ़ जाता है. इस बीच, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में केवल ओवेरियन, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी 10,821 मौतें दर्ज की गई हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ये आंकड़े नीति निर्धारकों के साथ-साथ आम जनता के लिए भी एक गंभीर चेतावनी हैं. बढ़ते कैंसर बोझ को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाने, समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है.

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