20 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’, जानें क्या है 2026 की थीम

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

World Day of Social Justice 2026: समाज में एकजुटता, सद्भाव और अवसर की समानता को बढ़ावा देने के साथ गरीबी, बहिष्कार, बेरोजगारी और असमानता जैसी चुनौतियों से निपटने का वैश्विक आह्वान करता है ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’. संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुरू किया गया यह दिवस हर साल 20 फरवरी को मनाया जाता है.

2007 में की गई थी इस दिवस की घोषणा

इस दिवस की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि राष्ट्रों में और उनके बीच शांति, सुरक्षा तथा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सामाजिक न्याय और विकास पर फोकस किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 26 नवंबर 2007 को 62वें सत्र में इस दिवस की घोषणा की थी. भारत में साल 2009 से हर साल 20 फरवरी को यह दिवस मनाया जाता रहा है.

न्याय पहलों की निरंतर जरूरत पर जोर देता है World Day of Social Justice 2026

यह दिन वैश्विक चुनौतियों, जैसे वित्तीय संकट, असुरक्षा और बढ़ती असमानता के बीच सामाजिक न्याय पहलों की निरंतर जरूरत पर जोर देता है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की साल 2008 की घोषणा ‘निष्पक्ष वैश्वीकरण के लिए सामाजिक न्याय’ भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो समान अवसर और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित है.

क्या है थीम

साल 2026 में यह दिवस “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता” थीम के साथ मनाया जाएगा. यह थीम दोहा में हुए दूसरे विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन और दोहा राजनीतिक घोषणा के बाद आई है. सदस्य देशों ने 1995 की कोपेनहेगन घोषणा को दोहराते हुए गरीबी उन्मूलन, उत्पादक रोजगार, सभ्य काम और सामाजिक समावेशन को सामाजिक विकास को मुख्य स्तंभ बताया है. थीम राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदलने पर जोर देती है, जिसमें आर्थिक, श्रम, जलवायु, डिजिटल और औद्योगिक नीतियों में सामाजिक आयाम को शामिल करना शामिल है.

सामाजिक-आर्थिक अंतर को पाटने में सक्रिय है

भारत में यह दिवस 2009 से मनाया जा रहा है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) विधायी सुधारों, जमीनी सशक्तिकरण और वैश्विक साझेदारी से सामाजिक-आर्थिक अंतर को पाटने में सक्रिय है. भारत का संविधान सामाजिक न्याय का मजबूत आधार प्रदान करता है. मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और जबरन मजदूरी पर रोक लगाता है, जबकि अनुच्छेद 24 बाल श्रम पर प्रतिबंध है. अनुच्छेद 38 असमानताओं को कम करने, अनुच्छेद 39 समान आजीविका और उचित मजदूरी, अनुच्छेद 39ए मुफ्त कानूनी सहायता और अनुच्छेद 46 एससी/एसटी तथा कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान है.

ऐसे समाज बनाने की है सरकार की कोशिश

मंत्रालय का लक्ष्य समावेशी समाज बनाना है, जहां हाशिए पर पड़े समुदाय सुरक्षित, सम्मानजनक और सार्थक जीवन जी सकें. शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रमों के साथ पुनर्वास पहलें चलाई जा रही हैं. भारत सरकार की कोशिश एक ऐसे समाज बनाने की है, जहां गरीब, पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले लोग भी सम्मान से जी सकें. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, आर्थिक मदद और सामाजिक कार्यक्रम जरूरी हैं.

कल्याण मंत्रालय को दो हिस्सों में बांट दिया

साल 1985-86 में भारत सरकार ने कल्याण मंत्रालय को दो हिस्सों में बांट दिया, एक महिला एवं बाल विकास विभाग और दूसरा कल्याण विभाग. इसमें गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय के कुछ विभाग भी शामिल कर लिए गए. बाद में मई 1998 में इस मंत्रालय का नाम बदलकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कर दिया गया.

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