Bihar Politics News: बिहार में 3 वजहों से अटका मंत्रिमंडल विस्तार, CM सम्राट चौधरी के सामने क्या है सस्पेंस?

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bihar Politics News: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है- आखिर मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा? सरकार बने करीब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक नई कैबिनेट का ऐलान नहीं हुआ है. इस देरी ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. विपक्ष इसे अंदरूनी खींचतान बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामान्य प्रक्रिया कह रहा है. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि इस सस्पेंस के पीछे असली वजह क्या है और कब तक यह इंतजार खत्म होगा.

मंत्रिमंडल विस्तार में क्यों हो रही देरी?

सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी की तीन वजहें हैं. ऐसे ही कुछ पेंच की वजह से मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी को विपक्ष ने अब मुद्दा बना दिया है.

  • पहला, परिपाटी के अनुसार जिस पार्टी का मुख्यमंत्री रहा है उसके मंत्रियों की संख्या कम रही है.
  • दूसरा, पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा को मंत्रालय में कैसे एडजस्ट किया जाए.
  • तीसरी वजह है कि जेडीयू कोटे से पुराने मंत्रियों को रिपीट किया जाए या निशांत कुमार के चहेते कुछ युवा विधायकों को कैसे जगह दी जाए.

विपक्ष के निशाने पर सरकार

मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी को विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना लिया है. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार आंतरिक खींचतान में उलझी हुई है और उसे जनता के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है. विपक्ष का कहना है कि जब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होगा, तब तक प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित रहेगा और विकास की रफ्तार धीमी पड़ेगी.

सीएम और डिप्टी सीएम पर बढ़ा दबाव

मौजूदा स्थिति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 29 विभागों की जिम्मेदारी है, जबकि दोनों उपमुख्यमंत्रियों के पास 18 विभाग हैं. इतने बड़े पैमाने पर विभागों का जिम्मा संभालना सरकार के लिए चुनौती बन रहा है. ऐसे में जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि कामकाज सुचारू रूप से चल सके.

हाई कमान की भूमिका भी अहम

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में बीजेपी की सरकार पहली बार बनी है, ऐसे में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मंत्रालयों के बंटवारे में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. बताया जा रहा है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल पश्चिम बंगाल के चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त है, जिसकी वजह से भी फैसला लेने में देरी हो रही है. इसके साथ ही विजय सिन्हा और निशांत फैक्टर भी समीकरण को जटिल बना रहे हैं.

जेडीयू ने आरोपों को बताया निराधार

हालांकि, आरजेडी के सारे आरोपों को जेडीयू निराधार बता रही है. जेडीयू प्रवक्ता निहोरा प्रसाद यादव का दावा है कि एनडीए के बड़े नेता जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल कर फैसला लेंगे. हालांकि, अब देखना होगा इस सस्पेंस से सर्माट चौधरी कब तक पर्दा उठाते हैं और कैसे बिहार में नई कैबिनेट का गठन करते हैं.

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