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सदाचार और शुद्ध आचरण से ही परिपुष्ट होती है भक्ति: दिव्य मोरारी बापू

पुष्कर (राजस्थान) में परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि सदाचार और शुद्ध आचार-विचार ही सच्ची भक्ति की नींव हैं। उन्होंने ध्यान, दान, माता-पिता के सम्मान और गीता के संदेश को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
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