New Delhi: बढ़ता हुआ आयात बिल, निर्यात में सुस्त वृद्धि और रुपये की गिरती कीमत सभी भारत के विदेशी व्यापार वित्त पर भार डाल रहे हैं. नतीजतन, देश का चालू खाता घाटा (सीएडी) पहले से ही 10 साल के...
बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि से भारत के मखाना बाजार को रफ्तार मिल रही है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक 2029-30 तक बाजार 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.