अनुकूल मौसम की स्थिति के कारण अगले छह महीनों में मुद्रास्फीति औसतन 2.5% रहने का अनुमान है. सोमवार को जारी एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों से उच्च आधार प्रभाव और मजबूत अनाज उत्पादन के कारण भारत...
भारत में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर मई में 14 महीनों के निचले स्तर 0.39% पर पहुंच गई है. इससे पहले अप्रैल में यह 0.85% थी. यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को जारी किए गए...
सब्जियों की कीमतों में आई गिरावट से मई महीने में घर का बना खाना थोड़ा सस्ता हो गया. इस दौरान शाकाहारी भोजन के मुकाबले मांसाहारी थाली के दाम में अधिक गिरावट रही. यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट...
अनिश्चित माहौल को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) जून एमपीसी में रेपो रेट में 50 आधार अंक तक की कटौती कर सकता है. यह जानकारी एसबीआई की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट...
महंगाई में कमी जारी रहने और भारतीय रिजर्व बैंक (Bank of India) से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने के साथ भारतीय बॉन्ड मार्केट (Indian Bond Market) मजबूत प्रदर्शन दर्ज करवा रहा है. जेफरीज की एक लेटेस्ट रिपोर्ट...
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सामान्य से अधिक मानसून के पूर्वानुमान से कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग में जोरदार वृद्धि होने की उम्मीद है, जबकि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी. क्रिसिल की बुधवार को जारी...
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति दर इस वर्ष अप्रैल में कृषि श्रमिकों (CPI-AL) के लिए 3.48% और ग्रामीण श्रमिकों (CPI-RL) के लिए 3.53% रही. पिछले वर्ष अप्रैल 2024 में...
लगातार कम होती महंगाई के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को आक्रामक रूप से कम कर सकता है. साथ ही मौद्रिक नीति के रुख को मार्च 2026 तक न्यूट्रल से हटाकर और नरम किया जा सकता है....
भारत के विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) बाजार में पिछले चार सालों में गतिविधि में नाटकीय वृद्धि देखी गई है, जिसमें औसत दैनिक कारोबार करीब दोगुना हो गया है. 2020 में 32 बिलियन अमरीकी डॉलर से 2024 में 60 बिलियन अमरीकी...
नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में पहली बार यूपीआई ट्रांजैक्शन 16.99 बिलियन से अधिक हुआ और मूल्य 23.48 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो किसी भी महीने में दर्ज की गई सबसे बड़ी संख्या है....
बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि से भारत के मखाना बाजार को रफ्तार मिल रही है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक 2029-30 तक बाजार 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.