हवा में बढ़ता धुआं, धूल और पार्टिकुलेट प्रदूषण सांस से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है.
बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में वृद्धि से भारत के मखाना बाजार को रफ्तार मिल रही है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक 2029-30 तक बाजार 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.