Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्येक वस्तु परमात्मा को अर्पित करो और फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करो। "प्रसादस्तु प्रसन्नता "प्रसाद का फल प्रसन्नता है। हर वस्तु या परिस्थिति हमारे लिए सुखद नहीं हो सकती...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मन को ईश्वर की भक्ति में मजबूत बनाने वाली एकमात्र औषध मंत्रजप है। मन पर झूठा विश्वास करने वाला ही फंस जाता है। मन जब अति शुद्ध होता है,...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, एक बार भगवान् श्रीकृष्ण भोजन कर रहे थे, वहां पर एक कीड़े को देखकर भगवान् हंस पड़े, रुक्मिणी ने कारण पूछा, प्रभु ने बताया कि यह ७२ बार देवताओं...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भक्त्या तुष्यति केवलम्। भगवान केवल शिष्टाचार देखते तो ब्याध के ऊपर भगवान की कृपा कभी न होती। श्री शिव पुराण में व्याध की कथा है। उसको जंगल में शिव...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, द्वितीय स्कन्ध में श्रीशुकदेवजी के द्वारा त्रिधा भक्ति का उपदेश किया गया। हम बहुत कुछ न कर पावे तो तीन काम कर लें। श्रवण, कीर्तन और मनन। कानों से...
पुष्कर में आयोजित प्रवचन में दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि पसीने की कमाई सद्बुद्धि देती है और धन का सदुपयोग ही उसे अमृत बनाता है. उन्होंने धर्म को धन से श्रेष्ठ बताते हुए पाप की कमाई से दूर रहने का संदेश दिया.
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सुन्दरकाण्ड हनुमत उपासना का सोपान है। बहुत ऐसे ग्रह हैं जो व्यक्ति के जीवन में रुकावट पैदा करते हैं। सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से सारे ग्रह अनुकूल हो जाते...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान की वन लीला में केवट प्रसंग एवं भरत चरित की कथा का वर्णन किया गया। भगवान की प्रत्येक लीला में भगवान की इच्छा ही प्रधान है। कहते हैं...
पुष्कर में संत दिव्य मोरारी बापू ने प्रवचन के दौरान कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सुबह ईश्वर और कर्म का स्मरण करने की सीख देती है. उन्होंने लोगों से सत्कर्म, भक्ति और अन्न के सम्मान का पालन करने की अपील की.