AI models Anthropic: दुनिया के सबसे ताकतवर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (AI मॉडल) पर अमेरिकी सरकार ने पहले बैन लगाया था, जिसे अब हटा लिया गया है. एंथ्रोपिक ने कहा कि रोक हटाने के बाद वह जल्द ही अपने सबसे ताकतवर AI मॉडल फेबल 5 और माइथोस 5 की पहुंच दुनिया भर में फिर से शुरू करेगी.
बता दें कि यह कोई आम AI नहीं है. इसे बनाने वाली कंपनी यानी एंथ्रोपिक खुद ही दावा करती है कि यह कुछ मामलों में हैकिंग और साइबर सुरक्षा के काम में इंसानों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका ने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इस पर रोक लगाया था, लेकिन अब ट्रंप की सरकार ने यह बैन हटा लिया है.
कंपनी ने क्या कहा?
एंथ्रोपिक कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “हमें सूचना मिली है कि अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने क्लॉड फेबल 5 और माइथोस 5 के दूसरे देश में निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिए हैं. ऐसे में हम कल से इनकी पहुंच फिर से शुरू करेंगे.”
दरअसल 12 जून को अमेरिकी सरकार ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए इन AI मॉडल को दूसरे देशों में उपलब्ध कराने पर रोक लगा दी थी. सरकार का कहना था कि टूल के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लगाए गए सुरक्षा उपायों में कुछ कमजोरियां मिली थीं. कंपनी ने फिर इन AI मॉडल को पूरी तरह हटा लिया. वही हाल ही में कंपनी ने बताया था कि उसे ट्रंप सरकार से अनुमति मिल गई है, जिसके बाद अमेरिका की कुछ चुनिंदा साइबर सुरक्षा कंपनियों को माइथोस 5 का इस्तेमाल करने दिया गया.
साइबर सुरक्षा और हैकिंग के काम में बेहद माहिर
पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जून को लिखे एक लेटर में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि एंथ्रोपिक ने इन AI मॉडल से जुड़े खतरों को कम करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर काम किया है. गौर करने वाली बात ये है कि एंथ्रोपिक की तरह दूसरी AI कंपनी OpenAI ने भी अमेरिकी सरकार के अनुरोध का पालन किया. उसने भी अपने नए और शक्तिशाली AI मॉडल जीपीटी-5.6 को भी फिलहाल सिर्फ कुछ मंजूरी मिले पार्टनर तक ही सीमित रखा है.
इसी बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, “हमें नहीं लगता कि यह सबसे बेहतर तरीका है.” उन्होंने यह बात जीपीटी-5.6 के लॉन्च के बारे में बताते हुए कही. हालांकि एंथ्रोपिक ने कहा था कि इन AI मॉडल की टेस्टिंग के दौरान उसने पाया कि यह साइबर सुरक्षा और हैकिंग के काम में बेहद माहिर है और कई मामलों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन करता है.
7 अप्रैल को कंपनी ने दावा किया था कि माइथोस प्रीव्यू पहले ही हजारों गंभीर सुरक्षा खामियां खोज चुका है, जिसमें लगभग हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर की कमजोरियां शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक जिस तेजी से AI आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए जल्द ही ऐसी क्षमताएं बहुत फैल जाएंगी. तब यह तकनीक ऐसे लोगों के हाथों में भी पहुंच सकती है जो इसका सुरक्षित इस्तेमाल नहीं करेंगे.
वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
कंपनी के अनुसार, यह AI बिना ज्यादा निगरानी के पुराने कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद बेहद गंभीर सुरक्षा खामियां खोज सकता है, जिन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत होती है. उसने एक ऐसी कमजोरी भी ढूंढी जो 27 साल से एक सिस्टम में मौजूद थी. इतना ही नहीं, यह उन कमजोरियों का फायदा उठाने के तरीके भी बता सकता है. इसके बाद कई देशों के वित्त मंत्रियों, केंद्रीय बैंक के अधिकारियों और वित्तीय क्षेत्र के बड़े लोगों ने गंभीर चिंता जताई. उन्हें डर है कि यह AI भविष्य में पूरी वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है.
पिछले हफ्ते ही अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने इन सबसे एडवांस AI मॉडल की ताकत की तुलना परमाणु हथियारों से की थी. वॉशिंगटन में एडब्ल्यूएस समिट के दौरान रैटक्लिफ ने कहा, “राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा सलाहकारों के साथ हमारी बातचीत में इन आधुनिक AI मॉडल के असर पर चर्चा होती है… इनकी ताकत को डिजिटल परमाणु हथियार कहना गलत नहीं होगा.”